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Shubha Kamat

Tragedy

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Shubha Kamat

Tragedy

डिप्रेशन

डिप्रेशन

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आता है बार बार वो खयाल 

नहीं आता है समझ जियूं या मरुं


हो गया गलती नासमझ से

ना रहा कोही फायदा सुधरने से 


फायदा ही क्या है और जीने से 

मरना ही अच्छा है और भुगतने से


काटूं चाकू से या गिरूं उपर से 

पीलूँ पाषाण या लगाऊं फांसी


आता है बार बार वो खयाल 

नहीं आता है समझ जियूं या मरूं।


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