STORYMIRROR

Astha Tiwari

Abstract

3  

Astha Tiwari

Abstract

चंद लम्हे

चंद लम्हे

1 min
230

कहीं किसी यादों में हमने खुद को लिखा है 

एक रात में खुद कुुुछ नया पिरोया है 

किसी शाम को गंगा किनारे बिताया है 

कुुुछ सुबह हसीं में गूंजी है 

तो कुछ आधी कच्ची नींद में 

कई यादेंं कुछ सिखाती है 

तो कुछ रूलाती है

बस कुछ ऐसे ही चंद लम्हेे हैं

याद कर के मुसकुराने को।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract