चलो
चलो
चलो कहीं चले
घूमती हुई सड़क के किनारे
किसी मोड़ पर
रोशनी के किसी
खम्भे के नीचे बैठ कर
बातें करें
चलो कहीं चले
अपने- अपने माजी के
नुचे घुटे घरौंदो से दूर
किसी सूखे हुए नाले की
पुलिया पर बैठ कर
बात करे
चलो कहीं चले
डरावने जंगल की
अंधेरी पगडडिण्यों पर
रतजगा मनायें
जिन्दगी के हर मरहले
पर बहस करे
झगड़े
ढेर सारी बातें करे
चलो कहीं चले
चलो कहीं चले
चलो !
