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DEVSHREE PAREEK

Abstract Romance Inspirational

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DEVSHREE PAREEK

Abstract Romance Inspirational

चिराग बुझा दें...

चिराग बुझा दें...

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बादल, बिजली, बारिश, बूँदें

हर मंजर चाहे ले लें कोई…

बस वह जुगनू रहने दें मुझ तक

बाकी हर एक चिराग बुझा दें…

शोहरत, तमन्ना, आरज़ू, मोहब्बत

हर कशिश अब उनकी है…

टूटा हुआ ख्वाब रहने दें पलकों में

बाकी हर एक ख्याल मिटा दें…

मेरे माझी की हसरत है

खुशियों की इनायत पाने की…

वो एक खुशी के मिलने तक

मुझे उनके कदमों में बिछा दें…

मंजिल की तलाश में वो

भटकता हुआ मुसाफिर है…

या तो उसको मिल जाए मंजिल

या फिर मेरा आशियाना जला दें…



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