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Nawal Kishore Singh

Abstract

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Nawal Kishore Singh

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चिंगारी

चिंगारी

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पछिया चलती चाल निराली, करके पूरी तैयारी।

घास फूस हैं सूखे पत्ते, साथ लिए समिधा सारी।

तीली एक जलाना भर है, जोत जगत सुलगाने को,

शोला अपने आप बने फिर, नन्हीं सी भी चिंगारी।



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