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Dr. Anuradha Jain

Abstract

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Dr. Anuradha Jain

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छाया

छाया

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छाया जो पेड़ की 

हो तो सुकून देती है,

छाया जो मां-बाप 

की हो तो बस एक एहसास देती है,

छाया जो दोस्त का साया 

बन के दे तो परिहास होती है,

किंतु जब हम छाया 

और का बनें तो वो 

एक आस और मुस्कान होती है। 



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