Srijan Verma
Abstract
चार कदम नहीं
हर कदम आपके साथ
चलना चाहते हैं
आपकी हर ख़ुशी हर गम में
शामिल होना चाहते हैं
खुदा से दुआ में
कुछ और नहीं
बस आपका साथ चाहते हैं।
पता ही न चला
आगे बढ़ने की ह...
रिश्ते
चार कदम
माँ
दिल की बात
खिलखिलाती हँस...
एक परिंदा
वो अलग है
अंश
क्या कुछ मुझको मिल गया, न जाने कहाँ मेरा दिल गया ? क्या कुछ मुझको मिल गया, न जाने कहाँ मेरा दिल गया ?
देश है हम सब का , मेरी सुरक्षा का भार उठाओ । देश है हम सब का , मेरी सुरक्षा का भार उठाओ ।
रोते रोते छोड़ आते हैं घर वाले हंसते हंसते पागल दाख़िल होता है। रोते रोते छोड़ आते हैं घर वाले हंसते हंसते पागल दाख़िल होता है।
दुख तो बहुत है लेकिन किस-किसको बताऐं, सुख को सबने जाना दुख में कौन साथ निभाएं। दुख तो बहुत है लेकिन किस-किसको बताऐं, सुख को सबने जाना दुख में कौन साथ निभा...
दिसंबर में ही उठी थी उसकी डोली... कम्बख्त आ गया फ़िर से दिसंबर ... दिसंबर में ही उठी थी उसकी डोली... कम्बख्त आ गया फ़िर से दिसंबर ...
दौड़ती जिन्दगी , कुछ तो मशवरा दे , आखिर किसके लिए, कैसे चला जाए ... दौड़ती जिन्दगी , कुछ तो मशवरा दे , आखिर किसके लिए, कैसे चला जाए ...
क्योंं जिनसे हमें उम्मीद ना थी वही यह सब कर जाते हैं । क्योंं जिनसे हमें उम्मीद ना थी वही यह सब कर जाते हैं ।
किसी को ना बनाए कभी गरीब ऊपर वाला।। किसी को ना बनाए कभी गरीब ऊपर वाला।।
हर समय जिम्मेदारी कांधे पर होना हर जिम्मेदारी को ताउम्र निभाना। हर समय जिम्मेदारी कांधे पर होना हर जिम्मेदारी को ताउम्र निभाना।
बीते हुए लम्हे बार बार याद आते हैं लम्हे हमें बुलाते हैं। बीते हुए लम्हे बार बार याद आते हैं लम्हे हमें बुलाते हैं।
समय बड़ा बलवान है ये धन से अधिक मूल्यवान है। समय बड़ा बलवान है ये धन से अधिक मूल्यवान है।
वह और कोई नहीं मेरी प्यारी दोस्त है। वह और कोई नहीं मेरी प्यारी दोस्त है।
सबक हमको रटा गया कोरोना, आईना दिखा गया कोरोना। सबक हमको रटा गया कोरोना, आईना दिखा गया कोरोना।
नहीं फिर किसी से पहचान छुपानी, खिली हैं ज़िन्दगी हमारी बतानी। नहीं फिर किसी से पहचान छुपानी, खिली हैं ज़िन्दगी हमारी बतानी।
डिजिटल हो गई ये दुनिया, मोबाइल बन गया सबकी जुबां डिजिटल हो गई ये दुनिया, मोबाइल बन गया सबकी जुबां
चूम लेते हो मेरा माथा बिना कुछ कहे तब मैं महसूस करती हूँ प्रेम का होना चूम लेते हो मेरा माथा बिना कुछ कहे तब मैं महसूस करती हूँ प्रेम का होना
मुझ पे फिर बरस जाओ बादल, इस आग की दवा मुझे मिली नहीं. मुझ पे फिर बरस जाओ बादल, इस आग की दवा मुझे मिली नहीं.
कम से कम आपा तो नहीं खोते थे, विचार करके ही आगे बढ़ते थे। कम से कम आपा तो नहीं खोते थे, विचार करके ही आगे बढ़ते थे।
इक पँछी का घर उजड़ा दरवाज़े पर लानत है। इक पँछी का घर उजड़ा दरवाज़े पर लानत है।
और घर बन जाये सुख-शांति, समृद्धि की शाला...। और घर बन जाये सुख-शांति, समृद्धि की शाला...।