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Kamlesh Padiya

Abstract

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Kamlesh Padiya

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बूंद की आस्था

बूंद की आस्था

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समंदर की एक लहर से कई बूंदों ने जन्म लिया। 

एक बूंद ने हिम्मत जुटाई और लहर से पूछ लिया।।


"माँ, यह गीला क्या होता है ?

कैसा दीखता है, कहाँ रहता है ?


लहर ने समझाया, बूंद को बहलाय। 

गीला का न रंग है, न कोई आकर है।।

यह तो एक अहसास है, एक भाव है। 

"गीला" तो "पानी" का अहम स्वाभाव है।।


मिलने को "पानी" से अब यह नादान बेचैन सी रहती है। 

समंदर की एक बूंद समंदर मै "पानी" को ढूंढती है।। 


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