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Ruchika Rai

Abstract

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Ruchika Rai

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बुजुर्ग का रोमांस

बुजुर्ग का रोमांस

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जिम्मेदारियों के बोझ को खुद से उतार कर,

चुराया जिंदगी के कुछ लम्हें उम्र के इस दौर में,

खुद से मोहब्बत के लिए ।


मशीनी जिंदगी की मशीनी भावनाएं उतार दी थी,

जरूरतें सबकी पूरी कर चुके थे,

था अब ये वक्त चुराया अपने प्यार के लिए

थोड़ी सी नोंक झोंक थोड़ी सी शरारत

थोड़ा सा प्यार और परवाह के लिए।


न बचपन की चंचलता थी न यौवन की चपलता

था तो सिर्फ उम्र के इस दहलीज पर परवाह।

थी मौन रहकर फिक्र और ख्याल रखना,

नही चाँद तारे तोड़ने की बात थी,

नही छेड़ छाड़ हँसी ठिठोली की रात।


था तो एक दूजे की जरूरतों का ध्यान।

बुजुर्ग होने के बाद यही रोमांस था,

जहाँ आयोडेक्स की खुशबू लगती थी इत्र सी।

बस यही प्यार था निश्छल निर्मल और पवित्र।


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