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Ashwini Hipparge

Romance

4  

Ashwini Hipparge

Romance

बस मुस्कराना चाहती

बस मुस्कराना चाहती

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बस मुस्कराना चाहती हूँ

एक ऐसा गीत गाना चाहती हूँ

खुशी हो या गम बस मुस्कराना चाहती हूँ। 


दोस्तों से दोस्ती हर कोई निभाता है

दुश्मनों की भी अपना दोस्त बनाना चाहती हूँ। 

जो हम उड़े ऊंचाई में अकेले, 

साथ में हर किसी का पंख फैलाना चाहती हूँ। 


वो सोचते की, अकेले हूँ मैं उसके बिना, 

तन्हाई साथ है मेरे, बस इतना बताना चाहती हूँ। 

बस खुशी हो हर पल, और पहले यहां गुलरान, 

हर किसी के गम को अपना बनाना चाहती हूँ। 

 

एक ऐसा गीत गाना चाहती हूँ, 

खुशी हो या गम बस मुस्कराना चाहती हूँ।


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