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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Comedy Romance Fantasy

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Comedy Romance Fantasy

बहुत परवाह करती है मेरी घरवाली

बहुत परवाह करती है मेरी घरवाली

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बहुत परवाह करती हैं मेरी घरवाली 

 श्रीमती जी कहतीं हैं कि उसे मेरी परवाह है बहुत 
पर काम करतीं हैं सब इसके उलट पलट । 
सुबह गर्म चाय मंगाई तो लस्सी ले आई 
शिकायत करो तो सॉरी बोल देती है झट ।। 

 "थके थके से लग रहे हो" कहकर शुरू कर देती है मसाज 
इस बहाने अच्छी खासी मरम्मत करने का निराला है अंदाज  "अभी आई" कहकर घंटों इंतजार कराती है 
बिस्तर पर वह हर रोज ऐसे ही तड़पाती है ।। 

 "मैं कितनी परवाह करती हूं" कहना कभी नहीं भूलती 
लेकिन हर वक्त ताने मारना अपना धर्म है समझती 
मुझे भी पता है कि वो दिल की सच्ची है नीयत है नेक 
लेकिन जताने का ढंग थोड़ा डिफरेंट है थोड़ा विशेष ।। 

 खिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ती है, गालियां 
उसे रोज चाहिए कंगन, हार, टीका, नथ, बालियां 
 उनके हाथ छोड़ जाते हैं मेरे चेहरे पर जगह जगह लाली 
जय हो जय हो जय जय हो , हे मेरी भोली घर वाली ।। 
 श्री हरि 
 27.6.2025        


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