भोजपूरी देवी गीत (आल्हा धुन) – मइया न देर लगाय
भोजपूरी देवी गीत (आल्हा धुन) – मइया न देर लगाय
मुंह से महिमा केतना सुनाये, कालिका बरनी ना जाय।
जेतना गाई ओतना पाई, गावत गावत पार ना पाय।
जय जय हे काली भवानी, किरपा तोहरो गवलो ना जाय।
हाथ जोड़ी के जे भी पुकारे, देवी उनपर खुश होई जाय।
नारियल सुपारी फूल चढ़ावे, माई मगन तब होई जाय।
बड़ी दयालु मोरी काली माई, आवत कबों ना देर लगाय।
लाल चुनरिया चम चम चमके, रूपवा माई निरख ना पाय।
जे भी पूजे उ फल पावे, भगतन झोली खाली ना जाय।
ढ़ोल नगाड़ा घंटा बाजे, बजे शंख रहे गगन घहराय।
जगमग जगमग ज्योति जरावे, धूप कपूर रहे सब महकाय।
काली माई मूहवा उजारा, जीभवा लप लप लाल लपकाय।
माई चरण सब शीश झुकावे, वर देवे माई हाथ उठाय।
जादू टोना भूत परावे, जब जब नाम काली गोहराय।
छप छप कांटे दुखवा हरावे, थर थर बैरी भाग पराय।
माई के आरती भारती गावे, जागा मईया ना देर लगाय।
