STORYMIRROR

Asha Jaisinghani

Abstract

2  

Asha Jaisinghani

Abstract

भैया मेरे

भैया मेरे

1 min
40

बंधंन मेरे प्यार का 

लायगा रंग ज़रूर

ना जाने ये क्या हो गया 

किसकी नज़र लग गई

हमारे प्यार को 

तुम नाराज हो बरसो बरस

तुम इतने तंगदिल तो कभी न थे

सच बताना 

 हर राखी सुनी कलाई देखकर 

 तुम्हारी रूलाई फुटती होगी, ज़रूर

बस ,अब बहुत हो गया

इस रक्षाबंधन मै आ रही हूँ

चाहे , जितना डाँट दो 

चार थप्पड़ भी मार लो

ये अबोला

हर हाल में मुझे 

खत्म करना है

मेरे भाई!

,


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract