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Sudhirkumarpannalal Pratibha

Tragedy

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Sudhirkumarpannalal Pratibha

Tragedy

बदला

बदला

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तुम्हारे

आने

की

प्रतीक्षा

करता

रहा

इस

बीच

में

ना

जाने

कितने

लोग

आए

मै

तुम्हारे

खातिर

सबको

छोड़

दिया

तुम

ना

आई

मै

तुम्हे

पा

सका

तुम्हारे

लिए

अनेकों

को

छोड़

दिया

तुमने

मुझे

कहीं

का

ना

छोड़ा

तुमने

मुझे

किसी

का

होने

नहीं

दिया

तुम

प्रेम

थी

मेरी

फिर

ये

कैसा

बदला

तूने

लिया।


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