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Krushna Sankhat

Abstract

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Krushna Sankhat

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बचपन

बचपन

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क्या वापस आएगा मेरा, 

बिता हुआ बचपन ? 

जब करती थी मे रोज शैतानी,

ओर खाने के लिए लड़ती,


क्या वापस.....


जब करते थे रोज मस्ती हम,

और स्कूल नही जाते थे हम, 


क्या वापस.....


मित्रो के साथ जगडती थी मे, 

तब स्कूल मे मुझ को डाँट पडती थी,


क्या वापस.....


वो कितना सुहाना दिन था,

जब करते थे हम ढेर सारी मस्ती, 


क्या वापस.....


वो दिन भी याद आद है मुझे, 

जब करती थी मे मित्रो के साथ शैतानी,


क्या वापस.....


वो बचपन मेरा ढुंढ रही हुं, 

कब लोटकर वापस आएगा, 


वो दिन मेरा कितना सुहाना था,

कब आए वो दिन ? 

क्या वापस आएगा मेरा, 

बिता हुआ बचपन ? 


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