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Dr.Rashmi Khare"neer"

Abstract

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Dr.Rashmi Khare"neer"

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बचपन

बचपन

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बीता है बचपन बरगद की छांव

ना जाने कितने खेल


कितनी कहानियां उसकी छांव

उसने देखी हमारी कितनी अठखेलियां


याद उसे भी हमारी आती होगी

बूढ़ा हो गया होगा

हमे तलाशता भी होगा


बहुत दूर तक उसकी छांव

आज मुझे भी वो खूब याद आ रहा।


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