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Sudhir Srivastava

Inspirational Others

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Sudhir Srivastava

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बैसाखी

बैसाखी

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हमारी संस्कृति से जुड़ा पर्व

महत्वपूर्ण त्योहार बैसाखी है

राष्ट्रीय चेतना, प्रकृति, जलवायु

कृषि संग इतिहास से

गहन जुड़ाव बैसाखी से है।

बैसाखी हरित क्रांति का पर्याय है

आज के दिन पंजाब में

फसल कटाई का श्री गणेश होता है,

नई फसल के आगमन का

भरपूर उल्लास होता है।

भांगडा और लोकनृत्य का 

आयोजन कर खुशियां मनाई जाती हैं,

जब तक फसल खेतों से

खलिहानों तक नहीं आ जाती

तब तक इसकी धूम रहती है।

बैसाखी सूर्य गणना का भी पर्व है

सूर्य मेष राशि में आज ही प्रवेश करता है।

विक्रम संवत नव संवत्सर भी

आज से ही शुरू होता है

श्रद्धालु नदी सरोवरों में

स्नान कर मंदिरों, गुरुद्वारों में जाते हैं

गढ़मुक्तेश्वर, हरिद्वार आदि में

गंगा किनारे मेले

बैसाखी आगमन पर लगते हैं।

मान्यतानुसार बैसाखी के दिन ही

भगीरथ गंगा को धरा पर

लाने में सफल हो पाए थे।

बैसाखी के साथ ही देश में

हरियाली खुशहाली छा जाती है,

पंजाब और उत्तर भारत में बैसाखी

धूमधाम से मनाई जाती है।

सिखों में बैसाखी का विशेष महत्व है

दसवें गुरु गोविंद सिंह ने 1669

आनंद पुर साहब में खालसा पंथ की स्थापना की थी।

जलियांवाला बाग नरसंहार भी

बैसाखी के दिन ही हुआ था,

आजादी की कुर्बानी का ये बलिदान

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का

सर्वाधिक मार्मिक दस्तावेज बना था।

शहीदों की याद में हर साल यहाँ

त्योहार मनाया जाता है,

बैसाखी पर्व को धार्मिक ही नहीं

बल्कि पूरे देश में

राष्ट्रीय चेतना पर्व की तरह

हर साल मनाया जाता है।



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