बात
बात
तुमसे बात करनी है
कितना कुछ पूछना है, जानना है
सुनना है, सुनाना है
जानना है तुम्हें कौन सा रंग पसंद है
बात करने का कौन सा ढंग पसंद है
तुम्हें भी चाँद को निहारना क्या अच्छा लगता है?
यह soulmate वाला कॉन्सेप्ट क्या सच्चा लगता है?
क्या तारों को ताकती हो तुम भी रात भर?
क्या किसी के दिल में ढूंढती हो अपना घर?
तुम्हें भी किसी के ख़याल क्या रातों जगाते हैं?
वे लोग अखरते हैं जो प्यार करते नहीं, केवल जताते हैं
क्या अपने सपनों के पीछे तुम भी बेतहाशा भागती हो?
क्या ग़ैरों को खुश करने की कोशिश में तुम भी अक्सर हारती हो?
क्या ऐसी बाहों की तलाश तुम्हें भी है
जिनमें समाकर तुम सारी थकान, सारी परेशानियाँ, सारे ताने भुला सको?
हर मुखौटे को उतार, खुद को खुद से मिलवा सको?
क्या लैला-मजनू, हीर-रांझा, सोनी-महिवाल की कहानियों में तुम भी खुद को तलाशती हो?
क्या इमोशनल फ़िल्में देखकर अपने आँसू सँभालती हो?
क्या सबके बीच होकर भी तुम्हें कुछ अकेला-अकेला सा लगता है?
यह hookup, situationship, breakup, patchup सब बनावटी जुमला सा लगता है?
Tinder के ज़माने में पत्र वाला प्रेम ढूंढती हो?
अपनों की बेरुख़ी से बार-बार ज़ार-ज़ार टूटी हो?
नंगे पाँव घास पर चलना क्या तुम्हें भी सुहाता है?
मानसून का असली मज़ा भीगने में आता है?
क्या कॉफी से ज़्यादा तुम्हें भी चाय पसंद है?
मोमो steamed नहीं, fried पसंद है?
क्या फूलों पर पड़ी ओस की बूँदें
तुम्हें भी आँसू सी लगती हैं?
क्या सावन की शीतल पुरवैया,
प्रियतम की साँसों सी लगती है?
नुसरत साहब की ग़ज़लें क्या दिन भर सुन सकती हो तुम?
इस आम से लड़के से दो पल ही सही, क्या मिल सकती हो तुम?
और सबसे ज़रूरी, क्या कभी सोचा है तुमने
कि कोई तुमसे ये सब पूछने के लिए न जाने कहाँ से बेताब है...
तुमसे बात करना कल भी एक ख़्वाब था, आज भी
एक ख़्वाब है...
तुमसे बात करनी है।
कितना कुछ पूछना है, जानना है
सुनना है, सुनाना है
तुमसे बात करनी है।

