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The KNJ

Abstract

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बापू मैं तेरा भारत हूं!

बापू मैं तेरा भारत हूं!

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मैं जल रहा हूं नफ़रत से, कहां प्रेम है ? कहां अमन ?

सत्याग्रह को भूल चुके हैं, हिंसा को कर रहे नमन।

घरवाले हैं, है घर नहीं, बेजान-सी इमारत हूं,

ग़लत हाथ में पल रहा, बापू मैं तेरा भारत हूं।


देख सियासी स्याही उछली, तेरी ओज़-निशानी पर,

सवाल कई हैं उठ रहे, बापू तेरी कुर्बानी पर।

आनेवाले तूफानों की, सुन सकता मैं आहट हूं,

डर के मारे दुबका सा, बापू मैं तेरा भारत हूं।


हां, भगत, सुखदेव, राजगुरु की, याद इन्हें जवानी है,

मगर तेरे बलिदानों की अब, शायद बात पुरानी है।

मैं शांतिप्रिय, मैं सत्यवाद, मैं अहिंसा में महारत हूं,

मैं अपनों से ही आहत हूं, बापू मैं तेरा भारत हूं।


ताकत की, संघर्षों की, दलील हुए थे तुम भी तो,

अफ्रीका में, घाना में, ज़लील हुए थे तुम भी तो।

भेदभाव और अत्याचारों का, असह्य, उग्र हिकारत हूं,

मैं घायल-सा, बिलखता-सा, बापू मैं तेरा भारत हूं।


अनशन, डांडी, धरने देते, बापू तेरा चरखा पाषाण,

अरे चुप रहना, धक्के खाना मुश्किल है, गोली खाना है आसान,

तेरे पाठों की बापू, मैं जिंदा कोई हरारत हूं,

आदर्शों को ज़हन में रखा, बापू मैं तेरा भारत हूं।


लाठी सहारा होती है, अनुरक्षक है, हथियार नहीं,

अपने बेटों को लड़ता देखूं मुझपे इससे घातक कोई प्रहार नहीं,

तुझको वापस लाने को, लिखी कोई लिखावट हूं,

क़लम थामे मध्य निशी को, बापू मैं तेरा भारत हूं।


ऋद्धिकाम करने की जगह, पत्यिष्णु को चलता हूं,

मैं नहीं रहा तेरा भारत, अपनी ही आग में जलता हूं!

राष्ट्र भक्ति के नारे हैं, वादे हैं और मैं गारत हूं

चुप रहता, चिल्लाता, रोता, बापू मैं तेरा भारत हूं।


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