STORYMIRROR

Kaushal Kumar Pandey

Inspirational

3  

Kaushal Kumar Pandey

Inspirational

बाल मनोविज्ञान

बाल मनोविज्ञान

1 min
206

हँसते हँसते रो देना बच्चों से सीखो।

स्वस्थ अगर रहना चाहो बच्चों सा चीखो।।


निडर सदा निज पथ पर कदम बढ़ाना है।

तो बचपन की तुम को रीति निभाना है।।


भेदभाव का भाव न जिसके उर में उपजे,

बाल मनोविज्ञान सही बतलाना है।।


निश्छल प्यार हृदय में जिनके पलता है।

वह बालक है सबको यह समझाना है।।


आओ सीखें बचपन से हम कपटहीनता,

सच्चे जीवन का यह सही ठिकाना है।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational