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मानव सिंह राणा 'सुओम'

Abstract Classics

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मानव सिंह राणा 'सुओम'

Abstract Classics

बागवान

बागवान

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जीतकर भी हार जाए वो है बागवान।

प्यार करे लुटता जाए वो है बागवान।।


हर पल तुमको खुश रखने की खातिर 

सब कुछ सहता जाए वो है बागवान।।


हर पल तुमको प्यार लुटाने की खातिर।

पल पल घुटता जाए वो है बागवान।।


हर पल तुमको जीवन देने की खातिर।

हर पल मरता जाए वो है बागवान।।


हर पल तुमको शीतलता देने की खातिर।

जीवन भर जलता जाए वो है बागवान।।


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