STORYMIRROR

Anju Kharbanda

Inspirational

3  

Anju Kharbanda

Inspirational

औरत

औरत

1 min
488


खुद में ही खुद का वजूद तलाशती है औरत

घुट घुटकर भी हँसी का लिबास ओढ़ती है औरत! 


सहनशील न होती तो बर्बाद हो जाते कितने ही घर

खुद को नींव का पत्थर बना घर को घर बनाती है औरत !


नौ देवियों के हर अवतार को धारण करती

एक मकान को घर और घर को स्वर्ग बनाती है औरत !


पुरुष समाज में अपने हर अधिकार को लड़ती

समाज को समाज कहलाने के लायक बनाती है औरत!


पीड़ित तन प्रताड़ित मन होकर भी

हर रात बच्चों को मीठी लोरी सुनाती है औरत!


सुबह से शाम घर नौकरी की चक्की में पिसकर

कुम्हलाए चेहरे पर मुस्कान की दुकान सजाती है औरत !


खुद दिन रात शमा की तरह जल जलकर

समाज को रौशनी की चमक से झलका देती है औरत !


अपमान का घूँट पी हर दुख को सीने में दफ़न कर

अंजुम हँसने और हँसाने का माद्दा जो रखती है 

वो है औरत!




विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational