STORYMIRROR

Rupam Kumar

Abstract

4  

Rupam Kumar

Abstract

अपनी आँखों में तुम हया रखना

अपनी आँखों में तुम हया रखना

1 min
453

अपनी आँखों में तुम हया रखना

घर में भी सर पे दुप्पटा  रखना।


है मेरी उँगलियों की कुछ  हसरत

इसलिए ज़ुल्फ़ को खुला  रखना।


पढ़ने लिखने में हो बड़ी अच्छी

पढ़ने  लिखने से  वास्ता रखना।


खुद को छूना नहीं हमेशा  तुम

कम से कम ज़िस्म तो नया रखना।


लोग  तुमको  जो बे-वफ़ा बोले

वैसे  लोगों  से  फासला रखना।


जान जाती है इश्क़ में अक्सर

जान  देने  का  हौसला  रखना।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract