Chinmay bajpai
Abstract
kahin pe Gira hua tha wo
tha wo budha sa ped...
kitne kisson ke tehkhane lekar
pada hua zamin pe tha wo ...
Budha sa ped
ख़ुदी मिटा कर दूजों को अपनाती हूँ मैं, फिर भी किसी के ध्यान कभी नहीं आती हूँ मैं। ख़ुदी मिटा कर दूजों को अपनाती हूँ मैं, फिर भी किसी के ध्यान कभी नहीं आती हूँ म...
और मेरी इस कविता को तुम पढ़ना चाहोगे बार बार। और मेरी इस कविता को तुम पढ़ना चाहोगे बार बार।
तुम कभी ये कह नहीं सकते किस में कम किस में ज्यादा है। तुम कभी ये कह नहीं सकते किस में कम किस में ज्यादा है।
दो पल ही खिलना यहाँ, फिर सब माटी धूल। दो पल ही खिलना यहाँ, फिर सब माटी धूल।
आ गए वापिस फिर से मेरे पास क्या काम है बोलो तभी आए हो इधर आ गए वापिस फिर से मेरे पास क्या काम है बोलो तभी आए हो इधर
बाईस नवंबर दो हजार चौबीस का दिन और आसीन हो जायेंगे अयोध्या के राजा राम। बाईस नवंबर दो हजार चौबीस का दिन और आसीन हो जायेंगे अयोध्या के राजा राम।
जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूरा करते दे जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूर...
क्रोध मेरे आकाश को आया और लगा वो तुम्हें दिखाने बहुत जतन से मना रही हूँ कह कर कि तुम बदल जाओगे... क्रोध मेरे आकाश को आया और लगा वो तुम्हें दिखाने बहुत जतन से मना रही हूँ कह कर क...
सपनों में जगह नहीं होती है निराशा की, खुशियों की चाहत हमें भर जाती है। सपनों में जगह नहीं होती है निराशा की, खुशियों की चाहत हमें भर जाती है।
जो विकसित हो कर सपनों को साकार बनाये। जो विकसित हो कर सपनों को साकार बनाये।
मन उदास हो गया और फिर मेरा ‘गंतव्य’ आ गया। मन उदास हो गया और फिर मेरा ‘गंतव्य’ आ गया।
तब हरेक बिस्तर के पास एक पियानो भी होना चाहिये। तब हरेक बिस्तर के पास एक पियानो भी होना चाहिये।
इसीलिए मुझसे ही मुझको, कई बार तूने ही मिलवाया है। इसीलिए मुझसे ही मुझको, कई बार तूने ही मिलवाया है।
तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में, तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में,
डूबने वाले का उदय निश्चित है बस भोर का इंतज़ार करने में आलस ना हो। डूबने वाले का उदय निश्चित है बस भोर का इंतज़ार करने में आलस ना हो।
इसलिये ही हर घर के किवाड़ में, दिखता है सिर्फ़ एक ही पल्ला ! इसलिये ही हर घर के किवाड़ में, दिखता है सिर्फ़ एक ही पल्ला !
अब तक अपने मन के भाव तुमने व्यक्त किए, अब मेरे भावों को समझना तुम अब तक अपने मन के भाव तुमने व्यक्त किए, अब मेरे भावों को समझना तुम
अप्राकृतिक खाद्य पदार्थों का लुप्त होते जाना स्वास्थ्य पर बीमारियों का पहरा अप्राकृतिक खाद्य पदार्थों का लुप्त होते जाना स्वास्थ्य पर बीमारियों का पहरा
शृंगार बालों का हुआ है, झूलती है चोटियाँ। चकले थिरक जाते खुशी से, बेलती जब बेटियाँ। शृंगार बालों का हुआ है, झूलती है चोटियाँ। चकले थिरक जाते खुशी से, बेलती जब बे...
इसकी गोद में सिर रखकर अब हम इतने बड़े हुए, यह जननी माता प्यारी, हम सबकी पालन हारी, इसकी गोद में सिर रखकर अब हम इतने बड़े हुए, यह जननी माता प्यारी, हम सबकी पालन...