STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Inspirational Others

4  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Inspirational Others

अंकुर- वृक्ष - अंकुर

अंकुर- वृक्ष - अंकुर

1 min
322

एक नन्हा सा अंकुर 

निपट अकेला खड़ा है 

बियाबान जंगल के बीच

जहां सुनसान रातें डराती हैं 

आंधी तूफान चिक्कारते हैं 

जंगली जानवरों का खौफ है 

मगर धरती मां का प्यार है 

नीलाम्बर की घनी छांव है 

घनघोर घटाओं का अमृत है

सूर्य की ओजस्वी किरणें हैं 

जीवन दायिनी वायु का आंचल है 

टिमटिमाते तारों की चादर है 

मखमली घास का बिछौना है 

लताओं की अठखेलियां हैं 

ऐसी विषम परिस्थितियों में 

प्रकृति पाठ पढ़ाती है कि

सदैव संघर्षरत रहो, कर्म करते रहो 

एक न एक दिन वृक्ष बनना है 

वृक्ष बनकर छाया, फल फूल से 

जीव मात्र का कल्याण करना है 

कुछ लोग तुम्हें काट भी सकते हैं 

केवल ठूंठ बनाकर छोड़ सकते हैं 

मगर तुम्हें उत्तेजित नहीं होना है 

उस ठूंठ में से भी फिर से कोई 

एक और नन्हा सा अंकुर निकलेगा 

और फिर से वह अंकुर वृक्ष बनेगा 

यही जीवन का नियम है 

यही सभी शास्त्रों का सार है 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational