अंकित शुक्ला
अंकित शुक्ला
हिंदी हमारी आन है,
हिंदी हमारी शान है,
हिंदी हमारी चेतना वाणी का
शुभ वरदान है,
हिंदी हमारी वर्तनी,
हिंदी हमारा व्याकरण,
हिंदी हमारी संस्कृति,
हिंदी हमारा आचरण,
हिंदी हमारी वेदना,
हिंदी हमारा गान है,
हिंदी हमारी आत्मा है,
भावना का साज़ है,
हिंदी हमारे देश की
हर तोतली आवाज़ है,
हिंदी हमारी अस्मिता,
हिंदी हमारा मान है,
हिंदी निराला,
प्रेमचंद की लेखनी का गान है,
हिंदी में बच्चन, पंत,
दिनकर का मधुर संगीत है,
हिंदी में तुलसी, सूर,
मीरा जायसी की तान है,
जब तक गगन में चांद,
सूरज की लगी बिंदी रहे,
तब तक वतन की राष्ट्र भाषा
ये अमर हिंदी रहे,
हिंदी हमारा शब्द,
स्वर व्यंजन
अमिट पहचान है,
हिंदी हमारी चेतना
वाणी का शुभ वरदान है।
