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Ayushman gouda

Others

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Ayushman gouda

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मनुष्यता

मनुष्यता

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विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,

मरो परंतु या करो कि बाद जो करें सभी


हुई न यो मृत्यु तो वृथा मरे,

वृद्धा जीए , मरा नहीं यही कि जो जीया न आपके लिए ।

वही पशु प्रवृत्ति है कि आप आप ही घरे,

वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।।


रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ वित्त में,

सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में


अनाथ कौन है यहाँ ? त्रिलोकनाथ साथ हैं,

दयालु दीनबंधु के बड़े विशाल हाथ है।

अतीव भाग्यहीन है अधीर भाव जो करें,

वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे । 


'मनुष्य मात्र बंधु है' यही बड़ा विवेक है,

पुराण पुरुष स्वयं पिता प्रसिद्ध एक है।


फलानुसार कर्म के अवश्य बाह्य भेद हैं।

परंतु अंतरैक्य में प्रमाणभूत वेद हैं।

अनर्थ है कि बंधु ही बंधु की व्यथा हरे


वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।


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