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sachin singh

Abstract

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sachin singh

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"An Inspiration"

"An Inspiration"

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देखकर एक ख़्वाब फिर जीने का मन करता है,

कर हौसला बुलंद फिर उठने का मन करता है


भूल भुलइया बनी ज़िंदगी से आज रास्ता पूछूँगा,

शायद अपने ही हाथों अपना दम घोटूँगा


लायक़ हूँ ये पता नहीं, पर हार नहीं मैं मानूँगा

भरोसा दे दूँ तुमको नायक बनकर लौटूँगा।


उठता हूँ मैं जब हूँ गिरता, उठता हूँ मैं जब हूँ गिरता

ये तुमको क्यूँ नहीं है दिखता, मैं ही नायक, मैं ही रचयिता


मैं ही नायक, मैं ही रचयिता पर मंथन में समय है लगता

लेकर अपनी नयी कहानी वापस फिर से आऊँगा,

भरोसा दे दूँ फिर से तुमको, नायक बनकर लौटूँगा।


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