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Asha Jakar

Inspirational


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Asha Jakar

Inspirational


ऐसे लाल बहादुर थे

ऐसे लाल बहादुर थे

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कांटो में खिले हुए तुम फूल सी बहार थे ।

पहचान सके न तुमको ऐसे लाल बहादुर थे ।।

ताशकंद के बने पुजारी भारत लौटके न आए,

क्या संदेश दिया ? मुंह से कुछ कह न पाए ।

चमन में आई हुई तुम अनुपम बहार थे ।

पहचान सके न तुमको ऐसे लाल बहादुर थे।।

जय जवान ,जय किसान यही तुम्हारा नारा था ,

सर्वस्व समर्पण भारत को ये आधार तुम्हारा था।

जलती हुई आग में तुम शीतल अंगार थे।

पहचान सके न तुमको ऐसे लाल बहादुर थे।।

तप - तप कर कंचन में निखार आता है ,

कष्टों में पलकर ही नर वीर कहलाता है।

तपे हुए कंचन की तुम अनूठी निखार थे।

पहचान सके न तुमको ऐसे लाल बहादुर थे।

अठारह महीनों में ही सबके मन पर छा गए ,

जीवन की पूर्णताअठारह मास में दिखला गए।

माँ भारती के तुमअपूर्व स्फुरित कंठहार थे ,

पहचान सके न तुमको ऐसे लाल बहादुर थे।।


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