अहोई अष्टमी
अहोई अष्टमी
माता अहोई करूं स्तूति मैं तोरी दोनों कर जोड़ें ,
माता दीह आशीष , महिमा ठाड़ी तुम्हारी दुवरिया।
आइल पावन कार्तिक मास,
अंधेरिया पाख की अष्टमी
की पूजे ला सगरो जग एहि
दिनवा माता अहोई के।
कर स्नान तन मन धन मैया वारु,
कर सोलह श्रृंगार, बनाऊं स्वादिष्ट पकवान म इया।
गेरू से उकेरू सुंदर चित्र हो मैया तुहार,
मैया आओ ना आओ हमरे अंगनवा,
मैया चंदन चौकी हमरे अंगनवा,
म इया आन विराजो हमरे अंगनवा
ठंडे ठंडे पानी का कलशा हमरे अंगनवा,
मैया हलवा पूड़ी हमरे अंगनवा,
मैया करी ना ज्यौनार हमरे अंगनवा।
हो मइया घी का दियना जराइब ,
तो हके फल, फूल,दीप नैवेद्य अर्पण करबे।
हो मैया कहब कथा अति पावन तोहार,
ऐ मैया पूजा स्वीकारी ,ऐ मैया भाग जगाई,
मैया बाड़े एक तोहरे से असिया।
लागल नेहिया तोहरे से
हो अहोई मैया।
भर देती झोलिया हमार,
मैया स्तुति करू तुहार दुनो कर जोड़।
मैया उठी बोली, मैया हंस बोली,
तेरी सगरी कामना पूरण होगी।
मैं तो झूम झूम गांऊ,
मै तो झूम झूम नाचूं,
मैया हो गई दयाल मैं तो हो गई निहाल।
सगरो जग तुहार सवाली ए म इया अनहोनी को होनी करती ,
ऐसी है दयाल मोरी अहोई म इया।
महिमा है नतमस्तक ऐ अहोई मैया।
महिमा ठाड़ी तुहरी दुवरिया दुनो कर जोड़,
ले ला अपनी सरनिया।
