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Anupam Kumar Pathak

Romance

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Anupam Kumar Pathak

Romance

आरज़ू मुकम्मल

आरज़ू मुकम्मल

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हर आरज़ू मुकम्मल है,

जो तुम्हें पा लिया,

वर्ना उम्र भी कट जाती है

और दुआ भी कबूल नहीं होती।


तुम्हारे आने के बाद मेरी

ज़िंदगी में,

सिर्फ बहारों का मौसम है,

फिज़ा में सिर्फ,

तुम्हारी ही महक है,

हर तरफ़ तुम ही तुम ही

सिर्फ तुम।





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