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Dr Mahima Singh

Classics Inspirational

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Dr Mahima Singh

Classics Inspirational

आओ दीप प्रज्वलित करे‌

आओ दीप प्रज्वलित करे‌

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आया कार्तिक पावन मास, लाया त्योहारों का मेला। सजनी पूजे साजन कर सोलह सिंगार,

 मृगांक भरदे घर आंगन खुशियों से।

 आओ एक दीप जलाएं, कुछ अच्छा करने की खुद से होड़ लगाएं ।

एक दीप प्रज्वलित उनके लिए जो थे खड़े साथ,

 जब अपनों ने भी साथ था छोड़ा।

यूं ही नहीं कहलाते वो धरती के भगवान!

 हैं योगदान कोविड-काल में चिकित्सकों का अमूल्य।

देश को निकाल लाए इस महा संकट से ,

किया निज सुख को बलिदान।

 एक दीप जलाएं हम उनके नाम , जो लाए अनगिनत जीवन में खुशियों का उजाला।

आया प्रकाश पर्व हम सबको बतलाने की,

 है हित हमारा तुम्हारा घर की सफाई संग कर लो निज मन की भी सफाई।

मेरे राम खाऊं मिठाई इस बार कुछ ऐसी की जीवन में मिठास घुल जाए,बोलूं मीठे स्वर में वाणी में ऐसी मिठास भर जाए।

तन वसन ऐसा सजे कीतना संग मन का अहम भी ढ़क जाए मेरे राम।

जीवन में शोर खुशियों का हो पटाखे जैसा, फुलझड़ी ऐसी की जीवन में उजाला भर दें।

रंगोली अल्पना के रंग ऐसे दो मेरे राम ,

देश की माटी के दीये, खिलौने हम घर लाये,

उनके घर भी खिलखिला उठे,आयी दिवाली सबको बतलाने एक एक दीप जलाएं हम खुशियों के नाम।

सब मिलकर एक हो जाए। शुभ हो यह दीप उत्सव।

 पाँच दिवसीय पर्व लाए राष्ट्र में खुशियां ही खुशियां।


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