आख़िर न्याय मिला है...
आख़िर न्याय मिला है...
जात, पात और धर्म की ये लड़ाई नहीं थी
ये तो नारी के मान-सन्मान की पुकार थी
बारह साल बेज्जती के ज़रूर बीत गए है
पर आज न्याय की सच्ची जीत हुई है
बड़ी हिम्मत से एक माँ अकेली लड़ रही थी
अपने बेबस हालातों से क़ानून से जूझ रही थी
उस माँ की आज हर एक दुआ क़बूल हुई है
संसार को मिली सुकून की निडर नींद है
अगर किसी ने ऐसी जुर्रत की तो उनकी शामत है
देर से ही सहीं हत्यारों को बड़ी सीख मिली है
औरत के इज़्ज़त की आज ख़ुशी की सुबह हुई है
आख़िर अंधेरे बादल को सहीं न्याय मिला है
भारत के न्यायप्रणाली पर भरोसा क़ायम हुआ है
देश की महानता देशविदेश में गूँजलेवाली है
