Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Manisha Gupta

Romance


5.0  

Manisha Gupta

Romance


आज कुछ मांगना चाहती हूँ

आज कुछ मांगना चाहती हूँ

1 min 587 1 min 587

जान आज कुछ मांगना चाहती हूँ

आपके माथे को चुमना चाहती हूँ

गले मे बाहों का वह हार चाहती हूँ

आज आपसे कुछ मांगना चाहती हूँ।


कंधे पर सर रखकर सोना चाहती हूँ

एक दिन बस आपकी बनकर रहना चाहती हूँ

जान आज आपसे कुछ मांगना चाहती हूँ

हाथों मे हाथ डालकर चलना चाहती हूँ।


होठों की सुर्खियों को चखना चाहती हूँ

आज आपसे कुछ मांगना चाहती हूँ

आपकी आंखों को बस पढ़ना चाहती हूँ

आपकी दिल की धड़कन को सुनना चाहती हूँ।


आज आपसे कुछ मांगना चाहती हूँ

आपकी दिल मे हरदम रहना चाहती हूँ

और हां आपसे लड़ना भी चाहती हूँ

आज आपसे कुछ मांगना चाहती हूँ।


कुछ और वक्त आपके साथ बिताना चाहती हूँ

आपकी बनकर हरदम रहना चाहती हूँ।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Manisha Gupta

Similar hindi poem from Romance