STORYMIRROR

Manisha Gupta

Others

2  

Manisha Gupta

Others

पत्र जो लिखा पर भेजा नहीं

पत्र जो लिखा पर भेजा नहीं

1 min
207

समय की गति कितनी बढ़ती चली गई

आज खोली जो डायरी एक पत्र मिल गई

उस पत्र को मैने ही लिखा था

अपने मन की बातों को उसमे पिरोया था


पर न जाने क्यो उसे न भेज पाई

आज उसे पढ़ने पर फिर

तुम्हारी याद आ गई

तुम्हारे चाहत की अलफाज है इसमे


इसमे पिरोयी थी हमारे हर वादे कसमें

चाह कर भी तुम्हें न भेज पाई थी

और चाह कर भी तुम्हारी न हो पाई थी

यही वह पत्र,

जो तुम्हें न भेज पाई थी


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन