Neerja Sharma

Classics Inspirational Thriller


4  

Neerja Sharma

Classics Inspirational Thriller


नासूर

नासूर

1 min 13 1 min 13

कोई भी रिश्ता 

यूँ ही नासूर नहीं बनता 

कुछ हिस्सेदारी हमारी अपनी भी होती है।


बड़ा आसान है

यह कह देना कि काट दो

पर क्या कभी सोचा कि नासूर क्यों बना ?


रिश्ते का बनना

नासूर बन फिर रिसना

क्या प्रयास किया पहले महरम लगाने का ?


रिश्ता बनता तभी है

जब दोनों तरफ से स्वीकीर्य हो 

नासूर कहना तो बात एक तरफा हुई ना।


रिश्ते, रिश्ते को

नासूर बनने से पहले ही

प्यार रूपी एमसील का जोड़ तो लगाओ।


साइंस के दौर में 

जब कैंसर का इलाज है

तो रिश्ते का नासूर बनना कहाँ लाज़मी है ?


समय रहते

यदि हो जाए तुरपाई 

तो शायद रिश्ता, रिश्ता न पाए नासूर।


Rate this content
Log in

More bengali poem from Neerja Sharma

Similar bengali poem from Classics