STORYMIRROR

lav kshirsagar

Abstract

3  

lav kshirsagar

Abstract

डर डर के हमें जीना नहीं

डर डर के हमें जीना नहीं

1 min
206


डरना नहींं डरना नहींं

डर डर के हमें जीना नहींं

कोरोना से हमें मिलना नहीं, मिलना नहीं

कोरोना से हमें मिलना नहीं .


वो बुलाये हमें घर के बाहर, तो जांना नहीं,

उसे कहना दरवाजे बाहर, लक्षमनरेखा है,

हमें बाहर जाना नहीं. जाना नहीं.

डरना नहीं, डर डर के हमें जीना नहींं.


हमारा यह प्रण है, जीना यही पर मरना नहींं.

सावधानी, और साफसफाई, रखना हमें भुलना नहीं

सावधानी, साफसफाई, रखना हमें भुलना नहीं,

डरना नहीं, डर डर के हमें जीना नहींं. 


समय पे रोज गरम खाना, और पानी ,

गरम करके पिना,

ये आदते हमें बिगाडनी नहीं,

डरना नहीं, डर डर के हमें जीना नहींं.


सगे रिश्तेदार और कुछ दोस्त और पडोसी,

उन्हे कहना यही,

कुछ दिनो के लिये हमें मिलना नहीं.

डरना नहीं, डर डर के हमें जीना नहीं.


पुरी दुनिया, दवाइ बनाने में जुटी सही,

हमें अपनी, और हमारे घरवालोकी  

जिंदगी की देखरानी करनी यही, करनी यही.

डर डर के हमें जीना नहीं,

कोरोना से हमें मिलना नहीं.


आज नहींं तो कल, इसे भूलना सही,

डर डर के हमें जीना नहीं,

कोरोना से हमें मिलना नहीं.!.



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract