Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
ये बारिशें
ये बारिशें
★★★★★

© Nikhil Sharma

Abstract Others

1 Minutes   6.8K    5


Content Ranking

ये बारिशें
बेचैन कर है रही 
ये बारिशें
बूंदे जो छूती बदन को लगता है यूँ 
इन बूंदों में बस रही है बस एक तू 
तेरे करीब होने का एहसास देती 
ये बारिशें

छू के गुज़रती है जो ये ठंडी हवा 
लगता आँचल लहराके तू दौड़ी हमनवा 
आँखे बंद करके महसूस करूं 
लगता के कानों में कुछ कहती 
ये बारिशें

जो देखता हूँ मैं फिर वो आसमां 
लगता है तेरी जुल्फों का है यह समां 
जब घिर आती है यह घटाएं 
लगता है यह है तेरी अदाएं 
फिर गिरता है वो जो कतरा पानी का 
सिहरन सी दे जाती हैं 
ये बारिशें

भीगता हूँ मैं इनमें तो लगता है यूँ 
अपने आगोश में मुझको रमा गयी तू 
सिर्फ एहसास है यह जज़्बात का 
करीब न होकर भी करीब है हम इस बात का 
हर लम्हा इश्क बढ़ाती 
ये बारिशें

#बेचैन कर है रही ये बारिशें

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..