दिल बहुत रोता है जी
दिल बहुत रोता है जी
दिल बहुत रोता है जी!
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आँख से पानी है बहता
दिल बहुत रोता है जी
मैं जो इक मजदूर ठहरा
दुख बहुत होता है जी।
है किसे परवाह मेरी
क्यों नहीं होती है जी
देख हालत आज मेरी
आत्मा रोती है जी ।
मैं अकेला चल रहा हूँ
जिंदगी जीने को जी
मैं बहाता हूँ पसीना
गम को ही पीने को जी ।
मैं बनाता छत यहाँ पर
छत नहीं रहने को जी
भूख से बच्चे है रोते
खाना नहीं है उनको जी।
मिल के मालिक क्या कहेंगे
सोच के डरता हूँ जी
डर के जीता ही रहता
डर के मरता हूँ मैं जी।
काम न हाथों को कोई
पेट तो मेरा भी जी
कुछ तो सोचो हे ! अमीरों
फर्ज तो तेरा भी जी।
घर में बूढ़ी माँ है मेरी
पोछती आँसू है जी
क्या बुढ़ापे ने बिगाड़ा
रो पिताजी कहते जी।
