Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
सुख के बोझ
सुख के बोझ
★★★★★

© Shreya Prakash

Inspirational

2 Minutes   6.9K    8


Content Ranking

एक गुमनाम सड़क, कुछ गुमसुम यादें 

कितनी आसानी से तोड़ गये, वो सारे वादे

मैं उम्मीद लगाए बैठा था, एक चैन की नींद सोने की 

वो आए, सब छीन ले गये, अब आस नहीं कुछ जीने की

मैं अकेला, अब जाऊं कहां

रेत सी फ़िसलती ज़िन्दगी, क्या रोक दूं यहां?

रोज़ सुबह सूरज की किरणें

लेकर आतीं, एक नया अंधेरा 

अब तू बता ए खुदा

कैसे ढूंढ़ू मैं, इसमें अपना बसेरा

रो रहा, तड़प रहा, इस दिखावे के संसार में 

कैसे निकलूं बाहर, फंस गया मैं

झूठ से पिरोए जंजाल में

मैं उन्हें कोसूं भी क्यों, वो तो थे मतलब के व्यापारी

मुझे तो ये अहसास न था, सौदे चढ़ेंगी, मेरी खुद की क्यारी

मुखौटों के पीछे के चेहरे, मैं पहचान न पाया 

कितनी अज़ीब बात है

अपनी कश्ती को मैंने, खुद डुबोया

पत्तों की आवाज़, अब भयानक सी लगती है 

हवा के झोंके, मानों बार-बार डसते हैं

लड़ रहा था मैं, आंखों पे पट्टी के साथ 

खुले नैन तो देखा, काट दिए अनजाने में

मैंने खुद के हाथ

मैं बिखर गया टूटकर 

अब बचा कुछ नहीं, ले गए सब लूटकर

शायद यही अंजाम था होना

मैं जा रहा, मेरे अपनों, अब तुम सब रोना

ये अंत नहीं शुरूआत है

ऊपर वाली की लाठी नहीं

हमारा खुद पर किया, आघात है

तुम चैन की नींद सोओगे, हम सुख के बोझ उठाएंगे 

घर-संसार विचरण पे होंगे, मन पिंजड़े में रोएंगे

 

मैं मुखौटे चैन कश्ती

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..