बिल्कुल हक
बिल्कुल हक
सब कुछ इतना शांत है,
कोई वाहन या चलने वाले लोग नहीं,
सड़कें खाली हैं, इसलिए पार्क हैं,
कहीं भी लोगों के साथ नहीं!
सब एक दम अकेला हो चुका हैं
हम सब अपने घरों के अंदर फंस गए,
कोरोना वायरस से डर के,
अगर यह आसपास कहीं भी है,
अब सभी से दूरी बनाए रखना!
हमें इससे सबक सीखने की जरूरत है,
हमें कभी-कभी रुकना और घूरना चाहिए,
हमेशा चलने वाली दौड़ में नहीं,
हम इन दिनों बहुत कुछ खो चुके हैं!
कहीं भी नहीं जाना...............
बाहर से कोई अंदर
अंदर से कोई बाहर
जैसे ही पूरा शहर बंद हुआ
कोई शकर क्या पूरा गाम बांध है
पूरा राज्य ,पूरा देश,पूरा विदेश
बंद बंद। बंद
एक गण्डा पूछने पर छुट्टी नहीं मिलेगा
आज घर पर रहो
स्कूल मत जाओ
कार्यालय मत जाओ
बाहर मत जाओ
क्या बात है
कब वापस आएंगी पूछने वाला नहीं
कब बाहर जाएंगी
कनेको कब आएंगी?
प्रश्न बिल्कुल नहीं
औरतों का इधर जाना
उधर जाना बात बिल्कुल नहीं
कोई नौकरानियों की मदद करने के लिए
भी नहीं?................
जैसा कि वे भी अपने घरों में फंस गए हैं!
हालांकि एक बात अच्छी है,
हवा अब साफ है,
और चारों ओर ध्वनि प्रदूषण नहीं,
हमारे ओजोन परत को मैंने सुना है!
कुछ सड़कों पर मोर और हिरण देखे जाते हैं,
पक्षियों को फिर से चहकते हुए सुना जाता है,
पेड़ों पर गिलहरी और तितलियाँ बाहर हैं,
पता नहीं वे कहाँ थे, कुछ दिन पहले!
कम से कम अब, वायरस के चले जाने के बाद,
हमें अपने आसपास भी रहना होगा,
यहाँ रहने वाले अन्य प्राणियों के लिए
धीमी गति से और उदार बनें,
यह दुनिया सबके लिये है,
कीड़ा ,मकड़ी,चिड़िया,बंदर,जानवर
पेड़,पौधे,समुन्द्र ,पहाड़,रेत ,सब,
इत्यादि के साथ इंसान भी,
प्यार से सबको पालो।
दुनिया जितनी हमारी है,
उतनी ही उनकी भी है!
उनको भी हक है।।
