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ख्वाहिश
ख्वाहिश
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© Rajat Tyagi

Romance

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तुम भी मुझे याद करो, ये ख्वाहिश नहीं मेरी||

तुम यू ही याद आ जाती हो, ये बसकी बात नहीं मेरी||

तुम भी मुझे इतनी शिद्दत से चाहों, ये ख्वाहिश नहीं मेरी||

मैं तुम्हें भूल जाऊये बसकी बात नहीं मेरी||

अक्सर अकेला बैठा जब उन गज़लों को गुनगुनाता हू,

जो बीते दिनो की याद दिलाते हैं तुम्हारी और मेरी||

 

लेकिन कभी चाहत नहीं रखता की तुम भी उन्ही कूचों पे वापस आओजो तुम्हें याद दिलाये मेरी||

मैं अक्सर उस कूंचे में आज भी घूम आता हूजहाँ तुम्हें देख कर सांसे रुक जाया करती थी मेरी||

आज चाह कर भी सांसे रोकने की कोशिश करता हू उन गलिहारों मेतो ये ख्वाहिश अधूरी सी रहे जाती है मेरी||

आज जानबूझ कर हर वो जुर्म करने की ख्वाहिश है मेरी||

जिससे मुलाक़ात हो जाए तुमसे, और सांसो को अलविदा कहे दे ये धड़कन मेरी||         

ख्वाहिश

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