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Prince Goyal

Drama Romance Tragedy

4  

Prince Goyal

Drama Romance Tragedy

वर्जित प्रेम

वर्जित प्रेम

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कॉलेज में पहली बार राहुल और सिमरन की मुलाकात एक बिल्कुल सामान्य दिन पर हुई थी। यह दोनों के लिए किसी भी लिहाज से खास नहीं था, लेकिन किसी को क्या पता था कि इस आम सी मुलाकात से उनकी जिंदगी का सबसे अहम मोड़ शुरू होने वाला था।

राहुल, एक शांत और गंभीर लड़का था, जो हमेशा किताबों में खोया रहता था। उसका ध्यान सिर्फ पढ़ाई में था, और उसकी दुनिया का कोई बड़ा हिस्सा नहीं था। वह हमेशा अपनी जगह पर बैठकर गुमसुम सा रहता था, ऐसा लगता जैसे वह अपनी दुनिया में खोया हुआ हो। उसकी आँखों में वह अकेलापन था, जो अक्सर उन लोगों में देखा जाता है जो ज्यादा बात नहीं करते। कभी कभी वह अपने दोस्तों के साथ भी ज़रा सा बोलता, लेकिन बस ज़रूरत भर।

सिमरन, बिल्कुल विपरीत थी। वह कॉलेज की सबसे चुलबुली और बातूनी लड़की थी। उसका हर कदम किसी फिल्म के सीन जैसा लगता था। उसके पास एक ऐसा आत्मविश्वास था, जो हर किसी को आकर्षित करता था। उसके चेहरे पर हमेशा एक मुस्कान रहती थी और वह किसी भी नए इंसान से मिलने में हिचकिचाती नहीं थी। उसे लगता था कि हर किसी से दोस्ती करना उसका अधिकार है। उसकी यही अद्भुत और आकर्षक व्यक्तित्व उसे कॉलेज में सबसे लोकप्रिय बना देती थी।

यह मुलाकात एक ग्रुप असाइनमेंट के दौरान हुई थी। असाइनमेंट का नाम था "सामाजिक मुद्दे पर एक शोध", और इस शोध को करने के लिए हमें एक टीम बनानी थी। अब, राहुल और सिमरन दोनों की टीम में थे, लेकिन पूरी तरह से अलग-अलग दुनिया से आए हुए थे। राहुल ने जहां खुद को पूरी तरह से इस काम में डूबा हुआ पाया, वहीं सिमरन उसे हल्के-फुल्के अंदाज में निपटाने की कोशिश कर रही थी।

शुरुआत में राहुल को सिमरन का यह लापरवाह और मजाकिया रवैया बहुत खलने लगा। वह अपनी गंभीरता से काम करना चाहता था, जबकि सिमरन ने सारा काम हंसी-ठहाकों में उलझा दिया था। वह किसी भी बात को हल्के में लेकर हंसी-मज़ाक करती और राहुल उसे गुस्से में आकर चुप करवा देता।

"तुम कभी सच में काम करोगी या बस यूँ ही शोर मचाती रहोगी?" राहुल ने एक दिन उकता कर कहा।

"तुम भी ना, राहुल! थोड़ा मज़ा लेना सीखो! इस दुनिया में सिर्फ पढ़ाई से क्या होगा?" सिमरन ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

उसके जवाब में एक तरह की मासूमियत थी, जिसे राहुल समझ नहीं पा रहा था। लेकिन फिर धीरे-धीरे उसने महसूस किया कि सिमरन की हर बात में एक गहरी सोच छिपी होती है। उसकी मस्ती के पीछे कभी-कभी गंभीर बातें भी होती थीं। वह अपनी जिंदगी को एक अलग ही नजरिए से देखती थी।

कुछ दिनों के बाद, राहुल ने सिमरन को एक अलग नजरिए से देखना शुरू किया। कॉलेज की असाइनमेंट्स खत्म हो गई थीं, लेकिन दोनों का रिश्ता कुछ और ही बनने वाला था। अब राहुल और सिमरन अक्सर एक-दूसरे से बात करने लगे थे। कभी वह उसे अपनी पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं के बारे में बताता और कभी सिमरन उसे अपनी छोटी-छोटी खुशियों के बारे में बताती। धीरे-धीरे, उनके बीच एक ऐसा रिश्ता बनता गया, जिसमें दोस्ती और परवाह थी, लेकिन कहीं न कहीं एक आकर्षण भी था।

"क्या तुम कभी सच्चे दोस्त बना पाओगी?" राहुल ने एक दिन उससे पूछा।

"अगर तुम मेरे जैसे किसी को दोस्त बना सको तो, तो तुम्हें सच्चा दोस्त बनने से कोई नहीं रोक सकता!" सिमरन ने बड़े आत्मविश्वास से कहा।

राहुल अब समझने लगा था कि सिमरन की जो मासूमियत और बेबाकी थी, वही उसकी असली ताकत थी। वह जिंदगी को खुलकर जीती थी, और उसकी यही आदत धीरे-धीरे राहुल में भी समाने लगी। अब राहुल अपनी पढ़ाई के अलावा, सिमरन से मिलने का भी इंतजार करता था।

कॉलेज के कैंटीन में जब दोनों एक साथ बैठते, तो पूरी दुनिया जैसे उनके आस-पास से गायब हो जाती। वे घंटों बैठ कर गप्पे मारते, कभी गाने गाते और कभी कॉलेज के अफवाहों पर मजाक करते। राहुल की यह दुनिया अब पहले से कहीं ज्यादा रंगीन हो गई थी। सिमरन के बिना उसकी जिंदगी अब अधूरी सी लगने लगी थी।

एक दिन, जब वह दोनों एक साथ कॉफी पी रहे थे, राहुल ने सिमरन से एक सवाल पूछा, "तुम सच में कभी किसी से प्यार करती हो?"

सिमरन हंसी से लोटपोट हो गई, "क्या तुम सोचते हो कि मैं सिर्फ प्यार के बारे में ही सोचती हूं? अरे, राहुल! प्यार सिर्फ दिल में नहीं, दिमाग में भी होना चाहिए। और मैं तो बस अपने जीने का तरीका ही बदल रही हूं।"

उस दिन राहुल ने सिमरन के दिल की एक और खास बात सीखी। वह लड़की जितनी खुश रहती थी, उतनी ही गहरी और गंभीर भी थी। उसका जीवन में एक उद्देश्य था, और वही उद्देश्य उसे आगे बढ़ने की ताकत देता था।

दोस्ती का यह रिश्ता अब काफी मजबूत हो चुका था। दोनों एक-दूसरे के लिए वह सहारा बन चुके थे, जिसका हर इंसान को जिंदगी में कभी न कभी जरूरत होती है।

कॉलेज के दिनों में एक-दूसरे के साथ बिताए गए ये पल उनके जीवन के सबसे अच्छे पल बन गए थे। राहुल ने कभी नहीं सोचा था कि एक चुलबुली और मस्तमौला लड़की उसके लिए इतनी अहम बन जाएगी। और सिमरन को भी कभी नहीं लगा था कि उसका यह शांत और गंभीर दोस्त कभी उसके जीवन का सबसे खास हिस्सा बनेगा।

उनकी दोस्ती अब न सिर्फ कॉलेज की दीवारों तक सीमित थी, बल्कि वे अपनी-अपनी दुनिया से बाहर आकर एक-दूसरे के साथ दुनिया को साझा करने लगे थे। दोस्ती के इस नए अध्याय ने दोनों को एक साथ चलने की ताकत दी थी, और इसके बाद आने वाले समय में उनका रिश्ता और भी गहरा होने वाला था।

.राहुल और सिमरन की दोस्ती अब कॉलेज के गलियारों से बाहर निकलकर उनके दिलों तक पहुंच चुकी थी। वे अब सिर्फ असाइनमेंट्स और क्लास रूम में एक-दूसरे के सहायक नहीं थे, बल्कि एक-दूसरे के सबसे अच्छे दोस्त बन गए थे। उनकी दोस्ती अब किसी भी हद तक नहीं बंधी थी—वह किसी भी बारे में खुलकर बात करते थे, जैसे जिंदगी के हर पहलू को एक-दूसरे के साथ साझा करने की कोई सीमा न हो।

दोनों एक-दूसरे के सबसे करीबी दोस्त बन चुके थे। सिमरन राहुल से अपनी परेशानियों के बारे में बात करती, और राहुल भी बिना किसी हिचकिचाहट के उसे अपनी दुखों और खुशियों से अवगत कराता। कॉलेज के दिन बहुत ही रंगीन और आनंदित थे, लेकिन उन दोनों के लिए यह कुछ और ही था। वे किसी भी छोटी से छोटी बात को बड़े गहरे तरीके से समझते थे, जैसे एक-दूसरे के दिलों के रास्ते को पूरी तरह से समझ लिया हो।

राहुल कभी सिमरन से अपनी छोटी-छोटी उपलब्धियों के बारे में बताता, जैसे उसकी पढ़ाई में कोई नई सफलता, या फिर किसी अच्छे ग्रेड की खुशी। सिमरन भी उसे अपनी छोटी-मोटी खुशियों के बारे में बताती—जैसे कॉलेज के नए फैशन ट्रेंड्स, या फिर उसके दोस्तों के साथ की गई मस्ती। वे दोनों जानते थे कि ये बातें दुनिया के किसी भी बड़े मुद्दे से ज्यादा अहम हैं क्योंकि ये उन दोनों के लिए सिर्फ वक्त का हिस्सा नहीं थे, बल्कि एक-दूसरे को समझने और जानने के तरीके थे।

कॉलेज के कैंटीन में बैठकर कभी वे दिन भर के किस्से सुनाते, कभी एक-दूसरे के मजाक उड़ाते। सिमरन अक्सर राहुल से कहती, "तुम इतने गंभीर क्यों हो? थोडा मस्त रहो यार!" तो राहुल मुस्कुराते हुए जवाब देता, "तुम हमेशा मस्ती में रहती हो, कभी तो गंभीर हो जाओ।" यह छोटे-मोटे झगड़े, छोटे-छोटे ताने उनके बीच एक अजीब सी समझ पैदा करते गए थे।

लेकिन हर छोटी सी बात एक नई गहरी दोस्ती का निर्माण कर रही थी। राहुल और सिमरन की दोस्ती में कभी भी कोई शब्द नहीं था, बल्कि उनका हर इशारा, हर मुस्कान, उनकी सच्ची मित्रता को जाहिर कर रहा था।

एक दिन जब वे दोनों कॉलेज के गार्डन में बैठे थे, सिमरन ने अचानक पूछा, "राहुल, तुम क्यों इतना ज्यादा सोचते रहते हो? कभी खुलकर जीते हो?" राहुल ने उसे देख कर हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, "बस यार, सोचता हूँ कि मेरी जिंदगी क्या है, क्या करना चाहिए।" सिमरन ने हंसी में कहा, "तुम्हारी जिंदगी तो बहुत ही सरल है, तुम हमेशा किताबों में खोए रहते हो!" राहुल ने सिर झुकाया और फिर उसे जवाब दिया, "तुम सही कहती हो, शायद मैं ज्यादा सोचता हूँ, पर मुझे लगता है कि मैं जो कर रहा हूँ वह सही है।"

यह छोटी सी बात और सिमरन की हंसी ने राहुल के दिल में कुछ और बदलाव किया। धीरे-धीरे वह महसूस करने लगा कि सिमरन उसकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। वह उसे अपनी साथी के रूप में देखता था, लेकिन उसे यह समझने में वक्त लग रहा था कि क्या यह सिर्फ दोस्ती है, या फिर यह कुछ और है?

दूसरी ओर, सिमरन भी यही महसूस करने लगी थी कि राहुल के साथ हर पल बिताना बहुत मायने रखता था। वह अब खुद से भी सवाल करने लगी थी—क्या राहुल के लिए उसकी भावनाएं सिर्फ दोस्ती तक सीमित हैं, या फिर यह कुछ और है? वह महसूस करती थी कि राहुल के साथ बिताए हर पल में कुछ खास था। उसकी आँखों में वह आकर्षण था, जो उसने कभी किसी और में नहीं महसूस किया था। लेकिन फिर भी, वह राहुल से कुछ कहने से डरती थी, क्योंकि उसे डर था कि कहीं उसकी दोस्ती को नुकसान न हो जाए।

कभी-कभी जब दोनों अकेले होते, जैसे कॉलेज के लंच ब्रेक के दौरान, राहुल और सिमरन किसी भी छोटी सी बात पर घंटों हंसी-मजाक करते। एक दिन राहुल ने सिमरन से मजाक करते हुए कहा, "तुम हमेशा मुझसे अच्छे फैशन टिप्स मांगती हो, कभी तो मेरी मदद करो!" सिमरन हंसी में बोली, "क्या तुम सच में मेरी मदद कर सकते हो? तुम तो सिर्फ किताबों के लड़के हो!" यह छोटा सा मजाक उनकी दोस्ती को और गहरा कर गया।

एक दिन कॉलेज की एक परियोजना पर काम करते हुए, दोनों पूरे दिन साथ रहे। जब वे रात के करीब कैंटीन में अकेले बैठे थे, तो सिमरन ने राहुल से कहा, "क्या तुम कभी किसी से प्यार करोगे?" राहुल ने थोड़ा सोचकर जवाब दिया, "क्यों, क्या तुम मुझे प्यार करने के लिए कह रही हो?" सिमरन ने झुकी हुई आँखों से मुस्कुराते हुए कहा, "नहीं, बस जानना चाहती थी कि क्या तुम कभी किसी से प्यार करोगे?"

राहुल ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया, "यह सवाल मुझे समझ नहीं आया, पर जब भी किसी से प्यार करने की बात होगी, तो मैं तुम्हें जरूर बताऊँगा।" सिमरन को लगा कि राहुल के शब्दों में कुछ खास था, लेकिन फिर भी वह अपने दिल की बात राहुल से नहीं कह सकी।

कॉलेज की लाइफ में सिमरन और राहुल का रिश्ता अब कुछ और ही हो गया था। वे दोनों एक-दूसरे के बारे में हर छोटी-सी बात जानते थे, और दोनों को महसूस हो चुका था कि उनके बीच कुछ और भी हो सकता है। लेकिन किसी ने कभी अपनी भावनाओं का इज़हार नहीं किया। वे दोनों इस बात से डरते थे कि अगर उन्होंने यह कहा तो कहीं उनकी दोस्ती खत्म न हो जाए।

वह दिन आ ही गया, जब दोनों के बीच एक छोटी सी झड़प हुई। सिमरन ने मजाक करते हुए राहुल से कहा, "तुम कभी मस्ती नहीं करते, हमेशा सिर झुके रहते हो!" राहुल ने झुंझलाते हुए कहा, "कभी तुम भी तो गंभीर हो जाओ, सिमरन!" यह झगड़ा बहुत छोटा था, लेकिन दोनों के लिए यह एक इशारा था कि शायद अब चीजें बदलने वाली थीं।

यह दोस्ती अब सिर्फ एक दोस्ती नहीं रही, बल्कि यह एक ऐसे रिश्ते में बदल चुकी थी, जिसमें दोनों के दिलों के बीच कुछ और था, लेकिन वह अभी भी इसे समझने के लिए तैयार नहीं थे।

अंत में, जब वे दोनों कॉलेज के कैंपस में बैठकर चाय पी रहे थे, तो राहुल ने अचानक कहा, "तुमसे कभी पूछा नहीं, क्या तुम्हें किसी पर विश्वास है?" सिमरन ने नज़रें उठाकर देखा और फिर हल्की सी मुस्कान के साथ जवाब दिया, "मैं तुम पर विश्वास करती हूं, राहुल। तुम हमेशा मेरे साथ होते हो, और शायद यह प्यार की शुरुआत है।"

यह शब्द राहुल के दिल को छू गए, और उसे समझ में आ गया कि सिमरन के लिए उसकी भावनाएं केवल दोस्ती तक सीमित नहीं थीं। धीरे-धीरे, राहुल और सिमरन के बीच दोस्ती से प्यार की शुरुआत हो चुकी थी, लेकिन अब उन्हें यह महसूस होने लगा था कि उनका रिश्ता अब किसी मोड़ पर आ चुका है, और वह दोनों इसके बारे में बात करने से डर रहे थे।

अगले कुछ दिनों तक, दोनों अपने रिश्ते के इस नए मोड़ को समझने की कोशिश करते रहे, लेकिन वे कभी यह नहीं समझ पाए कि यह सिर्फ दोस्ती है या फिर यह कुछ और है—यह सवाल उनके दिलों में गूंजता रहा।

राहुल और सिमरन की दोस्ती अब किसी और स्तर पर पहुँच चुकी थी। वो दोनों एक-दूसरे के साथ इतने क़रीब थे कि कॉलेज के कैंपस में एक-दूसरे के बिना कुछ भी अधूरा लगता था। एक-दूसरे की छोटी से छोटी बात को समझते हुए, वे अब अपने रिश्ते को और गहरे स्तर पर महसूस कर रहे थे। दोनों ही जानने लगे थे कि यह सिर्फ दोस्ती नहीं, बल्कि कुछ और है। लेकिन, इज़हार करने का वक़्त अभी तक नहीं आया था। वे दोनों अपनी भावनाओं के बारे में बात करने से डरते थे, क्योंकि कहीं उनकी दोस्ती पर असर न पड़ जाए।

कंप्यूटर लैब में बैठते हुए, सिमरन ने चाय का कप राहुल के सामने रखते हुए कहा, "राहुल, तुम कभी अपने बारे में खुलकर क्यों नहीं बोलते?" राहुल मुस्कुराया और जवाब दिया, "क्या तुम खुद अपने बारे में सब कुछ बताती हो?" सिमरन ने चिढ़ते हुए कहा, "अच्छा तो, तुम मेरी तरह नहीं हो, हमेशा अपने में डूबे रहते हो!" राहुल ने हंसी में कहा, "क्या तुम अब मुझे भी डूबा कर छोड़ोगी?"

इस मजाकिया बात के बाद, दोनों कुछ देर चुप रहे, लेकिन अचानक सिमरन ने देखा कि राहुल की आँखों में कुछ और था। वह थोड़ा सोचने लगा था, जैसे उसकी आँखें कह रही हों कि उसे कुछ कहना था, लेकिन वह शब्दों को ढूंढ नहीं पा रहा था। सिमरन को यह अहसास हुआ कि वह भी कुछ कहने वाली है, लेकिन वह डर रही थी कि कहीं यह पल खो न जाए।

कुछ पल के बाद, राहुल ने अपनी किताब बंद की और सिमरन की तरफ देखा। वह उसकी आँखों में देख रहा था, और उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी। उसने कहा, "सिमरन, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।" सिमरन ने गहरी सांस ली और कहा, "क्या बात है?" राहुल थोड़ी देर चुप रहा, फिर उसने कहा, "मैं... मैं... तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ।"

सिमरन के दिल की धड़कन तेज़ हो गई। वह समझ गई थी कि यह कुछ अहम बात होने वाली है। राहुल की आवाज में कुछ अलग ही बात थी। सिमरन ने बिना देर किए कहा, "क्या तुम सच में मुझे इतना ज़्यादा पसंद करते हो, राहुल?" राहुल ने सिर झुकाया, फिर अपनी आँखों में सीधे सिमरन को देखकर कहा, "नहीं सिमरन, मैं सिर्फ तुम्हें पसंद नहीं करता... मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।"

यह सुनते ही सिमरन के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान आ गई, लेकिन साथ ही वह थोड़ी देर के लिए चुप हो गई। उसे समझ में ही नहीं आया कि क्या कहे। उसने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा, "तुम सच में ऐसा सोचते हो?" राहुल ने सिर झुकाया और धीरे से कहा, "हाँ, सिमरन, मैं तुमसे दिल से प्यार करता हूँ।"

यह सुनकर सिमरन का दिल धड़कने लगा। उसकी आँखों में आंसू थे, लेकिन उसने उन्हें रोकने की कोशिश की। उसे राहुल के साथ बिताए हर पल की याद आ रही थी—वो सारी छोटी-छोटी बातें, जो अब उन्हें एक-दूसरे से जोड़ चुकी थीं। वह मुस्कुराई और बोली, "राहुल, मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। तुम मेरे लिए सब कुछ हो।" राहुल ने उसकी आँखों में देखा और फिर कहा, "तुम नहीं जानती, सिमरन, तुमने मेरी जिंदगी को बदल दिया है।"

सिमरन हंसी में बोली, "तुमने मेरी जिंदगी को भी बदल दिया है, राहुल। तुम तो बस सीधे-साधे लड़के हो, और मैं... मैं तो कुछ और ही हूँ!" राहुल ने चिढ़ते हुए कहा, "अच्छा, तुम मुझे अब सीधे-साधे लड़के कहोगी?" और अचानक दोनों के चेहरे पर हंसी की लहर दौड़ गई।

लेकिन जैसे ही उनका मजाक थोड़ा कम हुआ, सिमरन ने थोड़े गहरे शब्दों में कहा, "राहुल, तुम जानते हो, मुझे तुमसे हमेशा डर लगता था। अगर तुमने मुझे अपना दोस्त नहीं समझा होता तो हम कभी इस जगह तक नहीं पहुँच पाते।" राहुल उसकी बात को सुनकर एक पल के लिए चुप हो गया। फिर उसने कहा, "तुम कभी भी मुझसे डरने की जरूरत नहीं है, सिमरन। मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।"

उस पल के बाद, दोनों के बीच एक अजीब सा खामोशी छा गई। दोनों एक-दूसरे की आँखों में कुछ ढूंढ रहे थे, कुछ ऐसा जो शब्दों से कह पाना मुश्किल था। अचानक, सिमरन ने कहा, "क्या तुम मुझसे कभी गुस्सा हो?" राहुल ने हंसते हुए कहा, "तुमसे गुस्सा हो सकता है? तुम्हारे साथ रहने से बड़ा अच्छा कुछ नहीं हो सकता!" दोनों फिर से हंसी में खो गए।

लेकिन जैसे ही उनका यह मजाक खत्म हुआ, दोनों एक-दूसरे के साथ अकेले बैठकर अपनी भावनाओं को और अच्छे से समझने लगे। उनके लिए यह अहसास नया था, लेकिन साथ ही वह जानते थे कि अब उनका रिश्ता एक नई शुरुआत को छूने वाला है। दोनों ने एक-दूसरे के साथ भविष्य बनाने की बातें की, और यह महसूस किया कि वे दोनों एक-दूसरे के साथ अपने आने वाले दिनों को साथ बिताना चाहते हैं।

सिमरन ने अचानक पूछा, "राहुल, क्या तुम मेरे साथ हमेशा रहोगे?" राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा, "हाँ, मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा, सिमरन।" वह पल दोनों के लिए एक जीवनभर का वादा था, जो शब्दों से कहीं अधिक था।

फिर राहुल ने कहा, "तुम जानते हो सिमरन, कभी कभी लगता था कि हम दोस्ती तक ही सीमित रहेंगे, लेकिन अब महसूस होता है कि यह सिर्फ दोस्ती नहीं, कुछ और है।" सिमरन ने नज़रे झुका लीं और कहा, "मैं भी यही सोचती हूँ, राहुल। हम दोनों ने एक-दूसरे को इतना समझ लिया है, कि अब यह एक ऐसी यात्रा है जो हम दोनों के लिए बेहद खास है।"

वे दोनों इस एहसास में खो गए थे कि उनकी जिंदगी अब बदल चुकी है। अब दोनों अपनी जिंदगी का अगला कदम उठाने के लिए तैयार थे, लेकिन यह सब कुछ सिर्फ शुरुआत था।

इस पहले इज़हार ने उनके रिश्ते को एक नया रूप दे दिया था। यह सिर्फ प्यार का इज़हार नहीं था, बल्कि यह दोनों के लिए एक नई शुरुआत थी। राहुल और सिमरन अब एक-दूसरे के साथ हर पल बिताने के लिए तैयार थे, और उनका प्यार अब कुछ ऐसा बन चुका था, जिसका कोई अंत नहीं था।

कॉलेज की शामें अब कुछ और ही खास बन चुकी थीं। राहुल और सिमरन के बीच एक ऐसा रिश्ता बन चुका था, जिसमें शब्दों से ज्यादा समझ थी। दोनों एक-दूसरे के बिना जैसे अब कुछ अधूरा सा महसूस करने लगे थे। एक-दूसरे के संग बिताए गए हर पल को अब वे अपने जीवन का सबसे खूबसूरत हिस्सा मानने लगे थे। अब उनका प्यार किसी किताब की कहानी नहीं, बल्कि एक सच्ची और गहरी भावनाओं का संगम बन चुका था।एक शाम, कॉलेज के कैंपस में बारिश होने लगी। आसमान में बादल घिरे हुए थे, और हल्की सी ठंडी हवा से दिन का तापमान धीरे-धीरे ठंडा होने लगा। राहुल और सिमरन अपने क्लास से बाहर निकलकर एक पेड़ के नीचे खड़े हो गए थे।

बारिश के इस मौसम में, कॉलेज का माहौल भी थोड़ा रोमांटिक सा था। दोनों की आँखों में वह पुरानी शरारत, वही मुस्कान थी जो अब एक-दूसरे के लिए खास बन चुकी थी।

राहुल ने सिमरन से कहा, "क्या तुम हमेशा मेरे साथ रहोगी?" सिमरन ने मुस्कुराते हुए कहा, "कभी नहीं सोचा था कि इस सवाल का जवाब देने का दिन आएगा।" दोनों हंसी में खो गए, और फिर अचानक सिमरन ने अपना सिर राहुल के कंधे पर रख लिया। राहुल ने सिमरन के बालों को हल्के से अपने हाथों से सहलाया, और दोनों बारिश की बूंदों में एक-दूसरे की गर्मी महसूस कर रहे थे। इस प्यारी सी खामोशी में बहुत कुछ था, एक-दूसरे के होने का अहसास, और एक-दूसरे के लिए सच्चे प्यार का रंग।

राहुल ने उसे और करीब खींचते हुए कहा, "सिमरन, अब मुझे कभी अकेला छोड़ना मत। मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।" सिमरन ने भी धीरे से कहा, "राहुल, तुमसे ज्यादा प्यार किसी से नहीं किया जा सकता।" दोनों एक-दूसरे के गले लग गए। बारिश की रिमझिम बूंदें उनकी मुलाकातों को और भी खास बना रही थीं।

बारिश की बूँदें धीमे-धीमे खिड़की पर गिर रही थीं, जैसे किसी ने पूरे आकाश को शांति से आंसू देने का निर्णय लिया हो। कमरे में हलकी सी ठंडक और धुंधला रौशनी थी, जो माहौल को और भी रोमांटिक बना रही थी। राहुल और सिमरन की आँखों में एक अजीब सी ताजगी थी, जैसे दोनों ने एक-दूसरे को पूरी तरह से पहचान लिया हो, और एक-दूसरे के दिलों की गहराई में समा गए थे।

बारिश के उस शांत वातावरण में, राहुल ने धीरे से सिमरन का हाथ पकड़ा और उसे अपनी ओर खींचते हुए कहा, “तुम जानती हो, इस पल में मैं सब कुछ भूल चुका हूँ... सिर्फ तुम हो, सिर्फ तुम और मैं।”

सिमरन की आँखों में शरारत की झलक थी, लेकिन साथ ही उस लम्हे में गहरी सुकून भी थी। वह धीरे-धीरे राहुल के पास आई और बिना एक शब्द कहे, उसकी बांहों में समा गई। दोनों के दिल एक ही धड़कन में थामे थे, जैसे वे दुनिया की सारी चिंता और दूरी को एक-दूसरे के साथ छोड़ चुके हों।

एक पल के लिए वे दोनों चुप थे, बस एक-दूसरे की सांसों की आवाज़ और बारिश के संगीत में खो गए थे। कमरे का तापमान थोड़ा ठंडा था, लेकिन एक-दूसरे के करीब आते ही वह ठंडक गायब हो गई। राहुल ने सिमरन को अपनी बाहों में कसकर थाम लिया और उसके कानों में धीरे से कहा, “तुम मेरे लिए बहुत खास हो, सिमरन। मैं अपनी जिंदगी में सिर्फ तुम्हारे साथ हर पल बिताना चाहता हूँ।”

सिमरन ने उसके शब्दों को सुना और अपनी आँखें बंद कर लीं। वह समझ चुकी थी कि राहुल का प्यार सच में दिल से है। उसने धीरे से अपनी हथेली उसकी छाती पर रखी और महसूस किया कि उसकी धड़कन भी वैसी ही थी जैसी उसकी।

फिर, अचानक, कमरे का रौशनी कुछ धीमी हो गई। राहुल ने पास जाकर लाइट बंद कर दी। कमरे में एक हलकी सी अंधेरी सी सन्नाटा छा गया था। दोनों के बीच शब्दों की ज़रूरत नहीं थी, क्योंकि दोनों जानते थे कि उनका प्यार अब शब्दों से परे जा चुका था।

सिमरन ने धीरे से राहुल का चेहरा अपने हाथों में लिया और उसकी आँखों में झांकते हुए कहा, “राहुल, तुम जानते हो... मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ। जब से तुम मेरी ज़िन्दगी में आए हो, तब से सब कुछ बदल गया है।”

राहुल ने एक हल्की मुस्कान के साथ उसका हाथ थामा और धीरे से कहा, “और मैं भी, सिमरन। तुम मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा हो।”

इसी बीच, उनका शरीर एक-दूसरे के करीब आया, और जैसे ही वह एक-दूसरे की गर्मी महसूस करने लगे, उनके बीच की दूरी पूरी तरह से मिट गई। दोनों ने एक-दूसरे को हलके-हलके चूमा और यह वो पल था, जब वक्त थम सा गया था।

कमरे में हलकी सी आवाज़ थी, जैसे दोनों के दिल एक ही धड़कन में बज रहे थे। बारिश की बूँदें खिड़की पर गिर रही थीं, लेकिन अंदर का माहौल पूरी तरह से गूंज रहा था। धीरे-धीरे दोनों अपने प्यार की गहराई में डूब गए थे। उनकी साँसें तेज हो गईं, लेकिन इस हर पल की तीव्रता को वे दोनों एक-दूसरे में खोकर महसूस कर रहे थे।

सिमरन ने धीरे से अपना सिर राहुल के कंधे पर रखा और कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि प्यार इतना खास होता है। तुम मेरे लिए हर उस एहसास से भी ज़्यादा हो, जो मैंने कभी महसूस किया।”

राहुल ने भी सिमरन के सिर को अपनी बांहों में और कसकर पकड़ लिया, जैसे वह उसे अपने जीवन का हिस्सा बना रहा हो। दोनों को अब किसी शब्द की ज़रूरत नहीं थी, क्योंकि उनका प्यार अब खुद ही उनके दिलों में बसा हुआ था।

उनकी यह ख़ामोशी और प्यार की अभिव्यक्ति पूरी रात दोनों के बीच कायम रही, जैसे पूरा आकाश और धरती दोनों मिलकर उनकी इस शाम को देख रहे हों। उनके लिए अब हर पल एक अनमोल याद बन चुका था।

अगली सुबह, सूरज की किरणें धीरे-धीरे कमरे में दाखिल हो रही थीं। सिमरन की आँखें आधी खुली थीं, और जैसे ही उसकी आँखें राहुल के पास घुमा, वह अपने आप को थोड़ा असहज महसूस करने लगी। रात का वो पल, जो उसने कभी सोचा भी नहीं था, अब उसकी आँखों के सामने था। वह धीरे-धीरे उठी, बिस्तर के पास खड़ी होकर राहुल को देखा, जो गहरी नींद में था।

सिमरन को यह समझने में वक्त लगा कि जो रात उन्होंने साथ बिताई थी, वो सचमुच एक नए रिश्ते की शुरुआत थी। उसका चेहरा हल्का गुलाबी हो गया, और उसने धीरे-धीरे पलंग से नीचे पैर रखे। जैसे ही वह उठने की कोशिश कर रही थी, राहुल की नज़र खुली और उसकी मुस्कान ने सिमरन का दिल और भी धड़कने लगा।

“तुम ठीक हो?” राहुल ने नींद में भी अपनी आवाज़ में एक हल्का सा दर्द महसूस किया।

सिमरन ने मुस्कुराते हुए सिर झुका लिया, “हाँ... बस ये सोच रही थी कि रात का वो सब... वो सब क्या था?”

राहुल ने उसके पास आते हुए कहा, “क्या तुम उस पल को अपने दिल से नहीं जोड़ सकती? मैं जानता हूँ, यह अजीब था... पर क्या तुम मुझे समझती हो?”

सिमरन ने अपनी नज़रें उठाईं और धीरे से कहा, “मैं समझती हूँ राहुल... और शायद ये समझना था कि हमारे बीच कुछ खास है। रात का वो हर पल हमारे रिश्ते की नई शुरुआत थी, न कि कोई गलती।”

राहुल ने उसे हाथ से पकड़ा और कहा, “तो क्या तुम मेरे साथ हो? क्या तुम चाहती हो कि हम इसे एक नए रिश्ते की तरह देखे?”

सिमरन ने एक गहरी साँस ली और मुस्कुराते हुए कहा, “हां, मैं चाहती हूं कि हम इसे एक शुरुआत समझें। और जो कुछ भी कल हुआ, उसे मैं अपना मानती हूँ। मैं चाहती हूं कि हम दोनों हमेशा एक दूसरे के साथ रहें।”

राहुल ने सिमरन को अपनी ओर खींच लिया और उसके चेहरे को अपने हाथों में ले लिया। “मैं वादा करता हूँ, सिमरन। चाहे जो हो, मैं तुम्हारे साथ रहूँगा। हम दोनों का प्यार हमेशा गहरा होगा। और कल की रात जैसी कोई भी बात कभी हमारे रिश्ते में नहीं आएगी। मैं तुम्हारे साथ अपना हर सपना साझा करना चाहता हूँ।”

सिमरन ने अपनी आँखों में आंसू थे, लेकिन वो मुस्कुरा रही थी। "तुम हमेशा मेरे साथ रहोगे, है न राहुल?"

राहुल ने सिर हिलाया और कहा, “तुम्हें कभी अकेला नहीं छोड़ूँगा। हम दोनों का रिश्ता कभी भी तूटेगा नहीं। अब हम दोनों को साथ में अपने जीवन का एक नया रास्ता तय करना है।”

तभी दोनों का मन एक नए विचार की ओर बढ़ा। सिमरन ने कहा, “राहुल, क्या हम इसे सबको बताने का समय नहीं मानते? हमें अपने परिवार से बात करनी चाहिए। इस नए रिश्ते के बारे में हमें उन्हें बताना चाहिए।”

राहुल ने सिर हिलाया और कहा, “हाँ, मुझे भी यही लगता है। हमें उन्हें बताना होगा कि हम दोनों एक दूसरे के साथ अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। ये कोई छुपा हुआ राज नहीं रह सकता। हमारा रिश्ता इतना मजबूत है कि हमें इसका सामना करने का समय है।”

सिमरन और राहुल ने अपने परिवारों को बताने का फैसला किया। कुछ ही दिन बाद, दोनों ने अपने माता-पिता को एक साथ बुलाया। यह पल उनके लिए बहुत खास था, क्योंकि अब वे किसी भी प्रकार के संकोच के बिना एक-दूसरे से अपने रिश्ते के बारे में खुल कर बात करने जा रहे थे।

राहुल के माता-पिता और सिमरन के माता-पिता दोनों को उनके रिश्ते के बारे में जानकर थोड़ी हैरानी हुई, लेकिन सिमरन और राहुल के आत्मविश्वास ने उन्हें मजबूर कर दिया कि वे इसे स्वीकार करें।

सिमरन के माता-पिता ने पहले थोड़ा संकोच किया, लेकिन राहुल की सच्ची भावनाओं और उनके रिश्ते के प्रति गहरी प्रतिबद्धता ने उनके दिलों को छुआ। सिमरन की माँ ने कहा, "तुम दोनों का प्यार साफ दिखता है। मुझे यकीन है कि तुम दोनों एक-दूसरे के साथ बहुत खुश रहोगे। हम तुम्हारी शादी के लिए तैयार हैं।"

राहुल के पिता ने मुस्कुराते हुए कहा, "तुम दोनों ने जो निर्णय लिया है, वह तुम्हारी इच्छा है। हमें खुशी है कि तुम दोनों एक-दूसरे के साथ अपने जीवन की शुरुआत कर रहे हो। हम तुम्हारे इस निर्णय का समर्थन करते हैं।"

सिमरन और राहुल ने एक-दूसरे को देखा, और दोनों की आँखों में एक नए जीवन के सपने थे। अब उनके परिवार भी इस रिश्ते को स्वीकृति दे चुके थे।

यह पल दोनों के लिए एक नए जीवन की शुरुआत जैसा था। उनका प्यार और मजबूत हो गया था, और अब वे जानते थे कि उनका भविष्य एक साथ है।

राहुल और सिमरन के बीच, प्यार और विश्वास का एक सुंदर सफर चल रहा था। उनका रिश्ता धीरे-धीरे गहरा होता जा रहा था, और दोनों अपने भविष्य के बारे में एक साथ सोच रहे थे। यह वह समय था जब दोनों के परिवारों ने भी इस रिश्ते को स्वीकृति दे दी थी, और अब उन्हें यह महसूस हो रहा था कि वे एक-दूसरे के लिए बने हैं। उनके सपने सच हो रहे थे, और वे शादी के बारे में बात कर रहे थे। लेकिन जीवन ने उन्हें एक ऐसा मोड़ दिया, जिसका उन्होंने कभी अंदाजा भी नहीं किया था।

राहुल को अचानक हल्की सी तबियत खराब होने लगी। पहले तो उसने इसे ज्यादा अहमियत नहीं दी। उसे बस थोड़ा बुखार और सिर में हल्का दर्द महसूस हो रहा था, जिसे वह सामान्य समझ रहा था। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, उसकी स्थिति और बिगड़ने लगी। अब उसे चक्कर आने लगे थे, और कमजोरी महसूस हो रही थी। साथ ही, उसका बुखार भी उतार-चढ़ाव वाला हो गया था। राहुल की तबियत ने उसे चिंता में डाल दिया, और उसने फैसला किया कि अब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

सिमरन, जो हमेशा राहुल के साथ थी, ने भी उसे डॉक्टर के पास जाने के लिए कहा था। उसे भी राहुल की तबियत को लेकर चिंता हो रही थी, और उसने कहा, "राहुल, तुम जल्दी डॉक्टर के पास जाओ, ताकि हम पता कर सकें कि तुम्हें क्या हो रहा है।"

राहुल डॉक्टर के पास गया, और डॉक्टर ने उसकी स्थिति की जाँच की। डॉक्टर ने उसे कुछ सामान्य टेस्ट करवाने की सलाह दी। राहुल ने ब्लड टेस्ट और कुछ अन्य जांचें करवाईं, जिनका परिणाम अगले दिन आना था। राहुल को उम्मीद थी कि यह सब सामान्य होगा, लेकिन उसे जो कुछ भी हुआ, वह चौंकाने वाला था।

अगले दिन डॉक्टर ने राहुल को बुलाया और रिपोर्ट के बारे में बातचीत की। "राहुल, तुम्हारी रिपोर्ट्स में कुछ असामान्य बातें सामने आई हैं। तुम्हारे ब्लड टेस्ट के परिणाम सामान्य नहीं हैं। क्या तुम्हारे परिवार में किसी के रक्त संबंधी कोई समस्या रही है?" डॉक्टर ने यह सवाल पूछा।

राहुल थोड़ी देर के लिए चौंक गया। उसने डॉक्टर से कहा, "मुझे नहीं पता, डॉक्टर साहब, इस बारे में मुझे कुछ भी याद नहीं है। मेरे परिवार में कुछ भी असामान्य नहीं हुआ है।"

डॉक्टर ने फिर कहा, "राहुल, मुझे लगता है कि तुम्हारे रक्त समूह और DNA में कुछ ऐसा है, जो किसी भाई-बहन के बीच पाया जा सकता है।" यह सुनकर राहुल के होश उड़ गए। वह पूरी तरह से शॉक हो गया। उसे समझ में ही नहीं आया कि यह कैसे हो सकता है। क्या वह और सिमरन... भाई-बहन हो सकते हैं?

सिमरन की रिपोर्ट और समानताएँ

इसी दौरान, सिमरन भी अपनी नियमित चेकअप के लिए डॉक्टर के पास गई थी। डॉक्टर ने उसे भी कुछ टेस्ट करवाने के लिए कहा था, और सिमरन की रिपोर्ट भी अगले दिन आ गई थी। सिमरन को भी डॉक्टर ने बताया कि उसकी रिपोर्ट में कुछ असामान्य बातें सामने आई हैं। डॉक्टर ने कहा, "सिमरन, तुम्हारी रिपोर्ट में भी कुछ ऐसा दिख रहा है, जो किसी भाई-बहन के बीच पाई जाती हैं। क्या तुम और राहुल एक-दूसरे को जानते हो?"

सिमरन भी इस सवाल को सुनकर हैरान थी। उसने डॉक्टर से कहा, "जी, हम दोनों एक-दूसरे को जानते हैं, लेकिन इस सवाल का क्या मतलब है?"

डॉक्टर ने बताया, "मुझे लगता है कि आप दोनों का DNA और रक्त समूह कुछ ऐसा संकेत दे रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि आप दोनों भाई-बहन हो सकते हैं।" सिमरन के लिए यह एक पूरी तरह से चौंकाने वाली खबर थी। उसने सोचा, "क्या राहुल और मैं... भाई-बहन हो सकते हैं?" वह खुद को विश्वास नहीं दिला पा रही थी।

डॉक्टर ने दोनों को एक साथ बुलाया और बताया कि उन्हें DNA टेस्ट करवाना होगा ताकि यह निश्चित किया जा सके कि वे दोनों भाई-बहन हैं। राहुल और सिमरन को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। उन्होंने कभी भी इस तरह की स्थिति की कल्पना नहीं की थी। उनके बीच जो प्यार था, वह अब एक अजनबी सी स्थिति में बदल गया था। क्या यह सब सच था?

डॉक्टर ने दोनों को समझाया, "अगर आप दोनों सच में भाई-बहन हैं, तो हमें इसे पूरी तरह से समझने की जरूरत है, ताकि हम आपके रिश्ते के बारे में सही फैसला ले सकें।"

राहुल और सिमरन दोनों को इस स्थिति में बहुत कठिनाई हो रही थी, लेकिन उन्हें टेस्ट कराने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने डॉक्टर की सलाह मानी और DNA टेस्ट करवाया।

कुछ दिन बाद, जब रिपोर्ट आई, तो वह सभी के लिए एक बड़ा झटका था। रिपोर्ट में यह साफ-साफ बताया गया था कि राहुल और सिमरन वास्तव में भाई-बहन थे। यह खबर दोनों के लिए एक बर्फ की तरह ठंडी थी। राहुल और सिमरन, जिन्होंने अपनी जिंदगी का सबसे खूबसूरत रिश्ता एक-दूसरे के साथ जोड़ा था, अब यह जानने को मिले कि वे असल में भाई-बहन हैं।

जब यह सच उनके परिवारों तक पहुँचा, तो सभी का दिल टूट गया। राहुल और सिमरन के परिवारों ने यह स्वीकार करने में वक्त लिया। पहले तो यह किसी भी परिवार के लिए विश्वास करना मुश्किल था कि यह सच है, लेकिन बाद में सबने इसे स्वीकार किया। राहुल और सिमरन दोनों अपने-अपने परिवारों के पास गए और उन्हें बताया कि वे अब भाई-बहन हैं।

राहुल के माता-पिता और सिमरन के माता-पिता को यह एक गहरे सदमे जैसा लगा। वे शोक में थे और यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि इस स्थिति से कैसे बाहर निकला जाए। दोनों परिवारों में सन्नाटा था। यह घटना उनके जीवन को हमेशा के लिए बदल देने वाली थी।

राहुल और सिमरन दोनों के दिलों में गहरी उलझन थी। दोनों अब इस सवाल का सामना कर रहे थे, जिसे कभी उनके लिए सोचना भी मुमकिन नहीं था—क्या वे सच में भाई-बहन हैं? क्या जो प्यार उन्होंने एक-दूसरे से किया, वह अब बेमानी हो गया है? वे दोनों जानते थे कि उनका रिश्ता इतना गहरा था कि इससे निकलना आसान नहीं था, लेकिन अब यह सवाल उठ चुका था—क्या वे इसे जारी रख सकते हैं?

राहुल और सिमरन, दोनों अपने घरों में बैठकर यही सोच रहे थे कि क्या अब उनका रिश्ता वैसे ही रह सकता है? क्या यह समाज और परिवार के लिए स्वीकार्य हो सकता है? उनकी आँखों में आँसू थे, लेकिन वो एक-दूसरे से यह दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि वे मजबूत हैं। एक-दूसरे से दूर जाने का विचार भी उनके लिए असहनीय था, लेकिन सच अब सामने आ चुका था, और उनका दिल भारी था।

राहुल ने सिमरन से कहा, "सिमरन, क्या हम सच में भाई-बहन हैं? हम जो कुछ भी थे, क्या वह अब गलत हो गया है?" राहुल की आवाज में दर्द था, और उसका चेहरा उदास था। वह यह मानने को तैयार नहीं था कि उनका रिश्ता अब केवल एक याद बनकर रह जाएगा। सिमरन ने धीरे से सिर झुकाया, उसकी आँखों में आँसू थे, और वह कुछ नहीं कह पाई। वह भी यही सोच रही थी कि अब उनका क्या होगा?

"हमने एक-दूसरे को इस कदर अपनाया था," सिमरन ने रुंआसी आवाज में कहा, "हम दोनों के बीच जो प्यार था, वह क्या अब भी सच्चा नहीं रहेगा?" राहुल ने सिमरन को देखा, और फिर खुद से कहा, "हमारा प्यार कभी गलत नहीं हो सकता, लेकिन अब हमें यह समझना होगा कि हम एक-दूसरे के लिए क्या हो सकते हैं। हमें एक नई दिशा चुननी होगी।"

दोनों में खामोशी छा गई। वे दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे, लेकिन उनके दिलों में एक डर था। क्या वे एक-दूसरे से दूर हो सकते थे? क्या अब वे कभी एक-दूसरे के बिना रह सकते थे? यह सवाल उन्हें चैन से जीने नहीं दे रहा था। दोनों के दिलों में इस दर्द को समझने का प्रयास था, लेकिन इस सच को स्वीकार करने में दोनों को समय लग रहा था।

परिवार का निर्णय और चिंता

राहुल और सिमरन ने अपने परिवारों को इस बारे में बताया। दोनों परिवारों के लिए यह एक शॉक था, क्योंकि दोनों ने कभी भी यह नहीं सोचा था कि उनके बच्चे भाई-बहन हो सकते हैं। राहुल और सिमरन के माता-पिता यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि अब क्या किया जाए। वे अपने बच्चों के रिश्ते को लेकर चिंतित थे, और उन्हें यह सवाल था कि क्या समाज और परिवार इसे स्वीकार करेगा?

राहुल की माँ ने कहा, "हमारे बच्चों का प्यार बहुत गहरा था, और इसे इस तरह से खत्म करना बहुत मुश्किल है। लेकिन हम सब जानते हैं कि समाज और परिवार की स्वीकृति भी जरूरी है। क्या हम इसे एक नई दिशा में बदल सकते हैं?" सिमरन के माता-पिता भी यही सोच रहे थे। वे अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित थे, और यह फैसला लेना उनके लिए बहुत मुश्किल था।

राहुल और सिमरन दोनों अपने-अपने घरों में बैठकर यह सोच रहे थे कि अब क्या किया जाए। उनका प्यार इतना गहरा था कि उसे सिर्फ किसी कागज पर लिखकर खत्म नहीं किया जा सकता था। लेकिन क्या अब उनका रिश्ता उसी रूप में रह सकता था? वे दोनों एक-दूसरे से दूर नहीं जा सकते थे, लेकिन इस सच को स्वीकार करना भी मुश्किल था।

राहुल ने सिमरन से कहा, "हमारे रिश्ते में जो भी हुआ, वह हमारे दिल से था, और मैं जानता हूँ कि हमारे बीच कुछ खास था। लेकिन अब हमें अपनी जिंदगी में बदलाव लाना होगा। हमें अपने परिवारों और समाज की सोच को समझना होगा।"

सिमरन ने राहुल की आँखों में देखा और कहा, "हमारे बीच जो प्यार था, वह कभी झूठा नहीं था, राहुल। लेकिन अब हमें इसे एक नई दिशा में मोड़ना होगा। हम हमेशा एक-दूसरे के लिए होंगे, लेकिन क्या हमें अब किसी और तरीके से अपना जीवन जीना चाहिए?"

राहुल ने सिर झुकाया और कहा, "हमेशा के लिए नहीं हो सकता, सिमरन। हम दोनों को अब यह समझना होगा कि हम अपने प्यार को दूसरे रूप में देख सकते हैं।"

अब राहुल और सिमरन ने यह समझ लिया था कि उनका रिश्ता पहले जैसा नहीं हो सकता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि उनका प्यार खत्म हो गया। वे अब अपने रिश्ते को एक नए रूप में देख रहे थे। दोनों ने यह फैसला किया कि वे एक-दूसरे के लिए खड़े रहेंगे, लेकिन अब यह एक भाई-बहन का रिश्ता होगा।

सिमरन ने धीरे से राहुल की ओर देखा और कहा, "हम हमेशा एक-दूसरे के लिए रहेंगे, लेकिन अब हमें अपनी जिंदगी में कुछ और सोचना होगा। हमें अपनी शादी और भविष्य के बारे में सोचना होगा।"

राहुल ने मुस्कराते हुए कहा, "हम दोनों को अब एक नई शुरुआत करनी होगी। यह आसान नहीं होगा, लेकिन हमें इसका सामना करना होगा। हम हमेशा एक-दूसरे के साथ होंगे, लेकिन अब यह एक नया रिश्ता होगा।"

अंतिम मोड़: आप ही तय करेंगे आगे क्या होगा?

कहानी इस मोड़ पर आकर रुक गई है, जहां राहुल और सिमरन के रिश्ते ने एक बिल्कुल नया और उलझा हुआ रूप ले लिया है। अब यह सवाल उठता है कि आगे क्या होगा? क्या इस प्यार को एक नई दिशा मिलेगी, या यह रिश्ता टूट जाएगा? क्या राहुल और सिमरन अपनी ज़िंदगी में आगे बढ़ने के लिए कुछ नया रास्ता अपनाएंगे, या फिर वे इस रिश्ते को एक नई शक्ल देंगे?

राहुल और सिमरन के बीच जो गहरा प्यार था, वह अब उस कड़वी सच्चाई से टकरा चुका है, जो उनका दिल और दिमाग दोनों हिलाकर रख देती है। वे दोनों इस समय इमोशन और उलझन के बीच फंसे हुए हैं। क्या वे इस रिश्ते को तोड़ देंगे और अपनी जिंदगी में आगे बढ़ेंगे? या फिर वे इसे एक नए रूप में अपना पाएंगे? इस बीच उनके परिवार के लोग भी इस स्थिति से जूझ रहे हैं, और वे सब इस रिश्ते को लेकर एक नई सोच और निर्णय तक पहुंचने के बारे में विचार कर रहे हैं।

हमने आपको इस कहानी के अब तक के सफर में जिज्ञासा और उलझन से गुजरते हुए देखा है। राहुल और सिमरन का प्यार और उनका संघर्ष अब अपने सबसे बड़े मोड़ पर पहुंच चुका है। इस समय हमें आपकी राय चाहिए, ताकि हम इस कहानी को सही दिशा में आगे बढ़ा सकें। आपके विचारों के आधार पर हम कहानी का अगला कदम तय करेंगे।

यहां हम कुछ अलग-अलग विकल्प दे रहे हैं, जिन्हें आप पसंद कर सकते हैं। कृपया अपने पसंदीदा विकल्प को चुनें, और हम उसी के हिसाब से इस कहानी को आगे बढ़ाएंगे:

1. समाज और परिवार से दूर भाग कर नये नाम से अपनी दुनिया बसाना:

राहुल और सिमरन, इस सच्चाई को जानने के बाद यह फैसला करते हैं कि अब वे अपने परिवार और समाज से दूर जाएंगे। वे एक नए नाम और पहचान के साथ अपनी जिंदगी जीने का निर्णय लेते हैं, ताकि उनका प्यार कभी भी गलत न समझा जाए। वे एक-दूसरे के साथ एक नई शुरुआत करते हैं, जहां उनके लिए समाज और परिवार का कोई दबाव नहीं होता।

2. दुःख से हताश होकर आत्महत्या करने का निर्णय:

इस विकल्प में राहुल और सिमरन, अपने रिश्ते के टूटने से इतने परेशान हो जाते हैं कि वे जीवन से हार मान लेते हैं। वे महसूस करते हैं कि अब उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा है। अपने परिवार और समाज की प्रतिक्रिया को लेकर वे बेहद हताश होते हैं और अंत में दुखद तरीके से आत्महत्या करने का फैसला करते हैं।

3. एक-दूसरे को भूलकर अपनी-अपनी नई जिंदगी शुरू करना:

इस विकल्प में राहुल और सिमरन अपने रिश्ते को खत्म करने का फैसला करते हैं, और अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने का निर्णय लेते हैं। वे दोनों एक-दूसरे को भूलने की कोशिश करते हैं और नए रिश्ते और नए सपनों के साथ अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करते हैं।

4. परिवार का रिश्ते को स्वीकार करना:

राहुल और सिमरन के परिवारों ने यह स्वीकार नहीं किया कि वे भाई-बहन होते हुए भी एक-दूसरे से प्यार करते हैं। यह जानकारी सामने आते ही दोनों परिवारों में हंगामा मच गया और उन्होंने इस रिश्ते को नकार दिया। हालांकि, दोनों परिवारों ने उन्हें सलाह दी कि अगर वे एक-दूसरे से सच में प्यार करते हैं, तो उन्हें शादी कर लेनी चाहिए और अपना नया जीवन शुरू करना चाहिए।

5. DNA रिपोर्ट गलत साबित होती है और पुष्टि होती है कि वे भाई-बहन नहीं हैं:

इस मोड़ में एक चमत्कारी ट्विस्ट आता है, जिसमें यह पता चलता है कि जो DNA टेस्ट रिपोर्ट थी, वह गलत साबित हुई है। राहुल और सिमरन की असली पहचान के बारे में पता चलता है कि वे भाई-बहन नहीं हैं, और इस बात से उनका रिश्ता पूरी तरह से बदल जाता है।



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