STORYMIRROR

Dinesh Dubey

Drama Horror Thriller

4  

Dinesh Dubey

Drama Horror Thriller

वीराने का होटल भाग 7

वीराने का होटल भाग 7

5 mins
355

सभी के खाने का ऑर्डर हो गया था।

कविता कहती है, " खाना खा कर, हम लोग बाहर निकलते हैं, थोड़ा घूम फिर कर आयेंगे तो मूड ठीक हो जायेगा।

वीरेन और नितिन एक दूसरे को देखते हैं, !

वीरेन कहता है, " ठीक है पहले लंच कर लेते है हैं भी आधा घंटे रेस्ट कर लेते हैं, फिर जहां कही चलते हैं।

वंदना कहती हैं, " मेरा सिगरेट ले आए, ""!!

नितिन कहता है, " ये पूरा एरिया नो स्मोक जोन में है, इसलिए यहां कोई सिगरेट नही रखता हैं।

वंदना मुंह बना कर कहती हैं, " कैसा थर्ड क्लास होटल हैं, हम लंच के बाद इसे छोड़ देते हैं।?

नितिन कहता है, " आज का बिल चढ़ चुका है, अब तो कल ही छोड़ेंगे।

वंदना नितिन को घूरते हुए कहती है, " तुम कब से बिल की सोचने लगे, चलो आज का बिल मैं दे दूंगी पर यहां से निकल चलते हैं, ""!!

वीरेन कहता है " ठीक है, वंदना कहती हैं तो हम छोड़ देते हैं, पर लंच करके थोड़ा रेस्ट करके यहां से समान उठाओ और निकल लो।

तभी दूर बेल बजती है, और दरवाजा कोई खोले उसके पहले ही दरवाजा खोल कर सबका लंच लेकर वही लड़का और लड़की आते हैं जिन्होंने ब्रेक फास्ट लाया था।

कविता कहती हैं, " दरवाजा कैसे खोला तुम दोनो ने, वह तो अंदर से बंद था।

लड़की कहती है, " हर रूम की चाभी हमारे पास भी रहती है, हमने बेल तो बजा दिया था।

वह दोनो खाना लगाते है, खाने के खुशबू से सभी खुश हो जातें हैं, वह दोनो गाड़ी लेकर जाते हैं।

वंदना कहती हैं, " होटल के वर्करों में भी कितना अटिट्यूट है, कितने घमंड से बात करते हैं।

वीरेन कहता है, " अब छोड़ो भी पहले खाना खाओ उसके बाद बात करते हैं।

वह लोग लंच करने लगते हैं।

बाहर की तरफ दूसरे ग्रुप के भूत जमघट लगा रहे थे, उनका ध्यान इनकी खिड़की की ओर ही था, अचानक उनमें हलचल पैदा होती है।

उनका सरदार हकीम जो दिखने में बहुत ही खतरनाक और भयावह दिख रहा है, वह भी आकर खिड़की के और ही देख रहा था।!

वह पूछता है, " इसी कमरे में हैं वह लोग ?

एक कहता है, " हा सरदार, उसी कमरे में है, अब हम वहां तो जा नही सकते हैं।

हकीम कहता है, " कोई बात नही, उसकी भी व्यवस्था है।

नीचे खड़े सभी के चेहरे अजीब तरह के थे, बच्चे तो क्या बड़े भी उन्हे देख कर डर जायेंगे।

इधर नीचे महल के एक कमरे से छुप कर मुखिया और उसके साथी देख रहे थे।

मुखिया कहता हैं," ये हमारे कार्य में हमेशा बाधक रहा है, अब तक कई बार इन्होंने हमारा काम बिगाड़ा है, पर इस बार इन्हे हम सबक सिखाएंगे !

उसी समय एक नया भूत आता है, जो जरा टेढ़ा मेड़ा था उसकी गर्दन एक तरफ कंधे पर लटकीं थी, वह कहता है, " मेरी इस टूटी गर्दन का बदला कब लोगे, में यहां का सबसे सुंदर भूत था, और अब सबसे बदसूरत हो गया हूं, तुम्हे सरदार बना दिया तो भूल गए "!!

मुखिया कहता है, " सरदार अब भी तुम हो हो, में तो तुम्हारा पद सम्हाले हूं, मैं तो चाहता हूं, की दस दिन बाद होने वाली पूजा के बाद तुम पूरा भूतों के नगरी के सरदार बन जाओ, उस हकीम के बच्चे को सबक सिखाएंगे।

टेढ़ा कहता है, " तुम लोगो ने मेहमानों को फिर उसी कमरे में ठहरा दिया जहां से हर बार वह लोग निकाल ले जाते हैं।

मुखिया कहता है, "इस बार हमने जाल बिछाया है, जैसे ही हकीम इस बार कमरे की ओर आएगा हम उसे पकड़ कर बलि दे देंगे।

टेढ़ा कहता है, " हकीम भूतों का बच्चा है क्या जो उसे पकड़ोगे और उठाकर बलि दे दोगे, वह तुमसे अधिक ताकतवर सरदार है, मेरी तरह तुम्हारी भी गर्दन तोड़ देगा, इस बार होशियारी से काम लो, उन चारो को दूसरी ओर के कमरे में ले जाओ, वहां वह कभी पहुंच ही नहीं पाएगा, बाकी तुम्हारी मर्जी पर है,  मेरे लिए कुछ विशेष खाने की व्यवस्था करो रोज यही सब खा कर थक गया हूं, किसी मानव की कलेजी लाओ जल्दी !!

मुखिया कहता है, " ठीक है सरदार, मैं ले आता हूं किसी को पकड़ कर।

कमरे में सबका लंच खतम होता है, खाना इतना स्वादिष्ट था की वह लोग जरूरत से अधिक खा लिए थे !

कविता कहती हैं, " यार बहुत खाना हो गया थोड़ी देर के लिए रेस्ट करने के बाद चलेंगे !

अभी वह लोग बाते कर रहे थे तब तक सबको नींद आने लगती और जैसे बेहोशी छाने लगती है, वह चारो जहां थे वहीं लुढ़क गए थे।

दो मिनट के बाद दरवाजा खुलता है।

कुछ लोग आते हैं और उन्हे उठाकर ले जाते हैं, इसके बाद लड़किया आती हैं, इस वक्त वह अपने असली चुड़ैल रूप में थी, वह उनका सामान एक एक करके उठाती हैं, और लेकर जाती है।

उनको उठा कर ले जा रहे लोग जिस ओर से जा रहे थे, उस ओर एक बड़े से कमरे में कई लोगो को काटा गया था और उनके शरीर के कई टुकड़े किए गए थे, उनकी खोपड़ियों को लाइन से सजा कर रखा गया था,  उनके सर एकदम जीवित से लग रहे थे, उन्हे देख ऐसा लग रहा था जैसे वह अभी बोल देंगे,  वहीं एक ओर उनके पैर और हाथ भी अलग अलग रखे गए थे, वहीं दूसरे कमरे में ढेर सारा खून एक बड़े से बर्तन में भरकर रखा गया था, जिसमे से जिसे जब इच्छा हो रही थी एक डब्बा खून निकाल कर पी ले रहे थे, एक कमरे में, कई जानवरो को काट काट कर लटकाया गया था, और उसी कमरे के एक कोने में कुछ भयानक भूत और चुड़ैल उन्हे खा भी रहे थे, अर्थात ये भूतो का भोजन घर था, ,!!

अगर इन्हे यहां से जागते हुए ले जाते तो वह तो कबके बेहोश हो जाते और फिर इतने घबरा जाते की किसी काम के नही रह जाते, उन्हे दूसरे कमरे में पहुंचा देते है, वहा पर सभी को उनके बेड पर डाल देते हैं, पर उल्टा डालते हैं, वंदना को वीरेन के साथ और कविता को नितिन के साथ, डालकर चले जाते है।

क्रमशः


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Drama