वह बरसात का दिन और छोटी सीबेटी की समय सूचक सूझबूझ
वह बरसात का दिन और छोटी सीबेटी की समय सूचक सूझबूझ
बरसात के दिन पर पहले बहुत सारी रचनाएं लिखी हैं।
आज मुझे एक संस्मरण याद आ रहा है।
बरसात किसको अच्छी नहीं लगती ?
सबको अच्छी लगती है मगर अती हो जाती है तो बहुत मुश्किल आती है।
जैसे अभी नेपाल में कितना जोरदार फ्लड आया है।
कितना ज्यादा नुकसान हुआ है।
ऐसा सुनते हैं तो बहुत ही तकलीफ होती है।
कुदरत के प्रकोप के आगे किसी का कोई जोर नहीं चलता।
क्योंकि इंसान ने अपने फायदे के लिए कुदरत को बहुत नुकसान पहुंचाया है।
तो कुदरत अपना बदला लेती ही है क्या करें।
चलिए अब मेरे संस्मरण की बात करते हैं।
बात पुरानी है तब हम 1986 हम हॉस्पिटल में वार्ड और कुछ रूम थे। इमरजेंसी में पेशेंट को इलाज मिल सके इस हिसाब से रहने चले गए थे ।
थोड़े दिन ही हुए थे अचानक एक दिन बहुत तेज बरसात आई, हम सब सो रहे थे ।
सरकारी बिल्डिंग पता नहीं कैसा बांधकाम था जगह-जगह से पानी टपकने लगा और हम सब नींद में थे ।
काफी मेरी बड़ी बिटिया जाग गई थी ,उसने अपने दिमाग को चलाते हुए जहां-जहां भी पानी टपक रहा था उस सब जगह पर घर के बर्तन ला करके रखती है।
ताकि पानी जमीन पर ना गिरे और किसी के ऊपर ना गिरे बिल्कुल छोटी बच्ची थी।
उस समय तो हम सब चैन से सोए और वह पूरी रात पानी जहां टपकता वहां बर्तन रखती रही।
जब हम उठे तो उसकी समझदारी देखकर के दंग रह गए।
समझदार तो वह शुरू से थी मगर इस परिस्थिति में उसने जो किया वह बहुत ही तारीफ करने के काबिल था।
हम लोगों ने उसकी बहुत प्रशंसा करी उसको धन्यवाद दिया और बहुत प्यार किया कल रात ही यहां काफी तेज बरसात हुई तो हम याद कर रहे थे ।
आज लिखने का मन कर गया 8, 9 साल की बच्ची इतने दिमाग लगा करके उसने हमको गीला नहीं होने दिया अपनी बुद्धि का परिचय दिया। कभी-कभी बच्चे इतना कुछ कर जाते हैं जो कि हम सोच भी नहीं सकते हैं।
स्वरचित सत्य संस्मरण
विमला जैन
