The Power of Humanity
The Power of Humanity
फर्स्ट इयर आर्ट्स क्लास में आज तो बहोत शोर हो रहा था | सारे बच्चे MS. GANGULY की क्लास के लिए वैसे ही उत्साहित थे | पर आज कुछ नया अनाउंसमेंट होनेवाला था | मैम ने आने के साथ ही BEING GOOD HUMAN CAMPAIGN के बारे में पूछना शुरू किआ | इंसानियत क्या है ?कोई बता सकता है आप में से ?अच्छा इन्सान होना क्यों जरुरी है ? पढने के साथ जीवन में मोरल वैल्यूज /नैतिकता , जीवन में गोल होना भी जरुरी है | जैसे की आप लोग पढ़ कर आगे अपनी पढाई कहा करोगे ? सिर्फ आमदनी के लिए ? आमदनी के साथ लाइफ में प्रिंसिपल्स यानि उसूल होने भी बहोत जरुरी है | बच्चे तो यह सुनकर बोर होने लगे और उन्होंने गांगुली मैम से टॉपिक बदलने करने को कहा | तब MS गांगुली ने कहा रुको तो जरा बच्चो आज में आपको कबीर जो BEING GOOD HUMAN CAMPAIGN !!!की शुरुआत की है उनके बारे में बताती हु | सब कबीरजी का नाम सुन कर सरप्राइज हो गए | इतने महान व्यक्ति को तो सब जानते है जो आज के दौर के सबसे successful स्पोर्ट्स पर्सनालिटी है – रनर है |अब बच्चे भी काफी इन्तेरेस्तिंग मूड में आ गए और उनको इस कैंपेन के बारे में और भी उत्सुकता हुई के यह है क्या ?
MS गांगुली सब बच्चो को अब तो फ़्लैश बेक में ले कर गए |कबीर अपनी फॅमिली के साथ एक छोटे से गाव के रहने वाले है |वो एक गरीब फॅमिली से थे |कभी कभी खाने के लिए भी पैसे नहीं होते थे | पर कबीर के माता पिता कड़ी मेहनत कर के पैसे कमाते थे जिससे कबीर को पढ़ा सके | कबीर का जुकाव स्पोर्ट्स की तरफ था| आस पास के गाव में कबीर को दौड़ यानि रनिंग में कोई हरा नहीं सकता था | रनिंग RACE में एक खास तरह के जुटे पहन कर दौड़ने की प्रैक्टिस करनी जरुरी होती थी और अगर state LEVEL पर पहोचने के लिए उसको खास प्रकार की कोचिंग की जरुरत थी| जो इस छोटी सी आमदनी इस गरीब परिवार के लिए मुमकिन नहीं था | माता पिता ने अपने दुसरे बेटे की पढाई सरकारी स्कूल में से करने का फैसला किया |क्युकी छोटू जो कबीर का छोटा भाई था वह भी कबीर के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार था| सबको कबीर में उम्मीद नजर आई और सबके लिए सुकून वाला भविष्य भी | कई बार थकाने वाली कड़ी प्रैक्टिस और पारिवारिक परिस्तिथि से कबीर भी हिम्मत छोड़ देता था | पर कबीर को अपने परिवार से बहोत प्यार था | अपने परिवार के लिए वह सब कुछ करने को तैयार था |आखिर कबीर की मेहनत रंग लाइ | कबीर का state/राज्य कक्षा पर सिलेक्शन हो गया| एक दिन प्रैक्टिस के दौरान कबीर को पैर में बहोत चोट लग गई जब की कुछ दिनों के बाद कबीर की फाइनल RACE थी और सारे राज्य के खिलाडी उसमे हिस्सा लेने वाले थे | कबीर से सबको बहोत उम्मीदे थी | पर चोट की वजह से डॉक्टर्स ने भी कबीर को दौड़ने के लिए मना कर दिया था क्युकी कुछ दिन तक पैर की ठीक तरह से देखभाल की तो वह शायद ही दौड़ पाए |
उसके माता पिता और भाई ने दिन रात उसकी सेवा की |उसको चलने में मदद की और कबीर ने भी अपना हौसला बनाए | कबीर की माँ ने कबीरके लिए बहोर राते जागकर उसके लिए प्रार्थना की और सेवा की |स्टेट लेवल रेस का दिन नज़दीक आ गया था lउसके माँ-बाप की सेवा और प्रार्थना सफल हुई और वह रेस के लिए बिलकुल ठीक हो गया l
जिस दिन वह रेस के लिये जा रहे था तभी रस्ते में उसने एक गाड़ी का एक्सीडेंट देखा lवह सुनसान रास्ता था, आसपास कोई भी नहीं थाlकबीर को अपनी रेस के लिए बहुत देर भी हो रही थी | पर कबीर ने अपने पिताजी से रुकने के लिए कहा, ताकि वह उस आदमी की मदद कर सके l तब उसके पिताजी ने उससे कहा, की हम रेस के लिए लेट हो जाएंगे l
कबीर इंसानियत में मानता था और वह उस घायल आदमीकी मदद करना चाहता था lउन्होंने गाड़ी रोकी, उस आदमी को गाड़ी में बिठाया lउसको पास वाले अस्पताल में छोड़ा और उसके घर पर यह घटना की जानकारी भी दीlफिर वह जल्दी से रेस के लिए निकल गया|
कबीर रेस के लिए बहुत लेट होगया थाl रेस बस शुरू ही होने वाली थी
बहुत रिक्वेस्ट करने पर कबीर को रेस की अनुमति दी गयी lपर उसको तैयारी का टाइम ही नहीं मिला lरेस शुरू होगयी l
पहला राउंड तो कबीर आराम से जीत गया, अब दूसरा और फाइनल राउंड ही बाकी था | अचानक से उसके पैर में बहुत दर्द शुरू हो गया , जहा उससे चोट लगी थी| सबने उससे दूसरे राउंड मे दौड़ने के लिए मना किया पर उसने अपने आपको इस दिन के लिए तैयार कर रखा था lक्युकी वह इस दिन का बड़े बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था lभला अब वह कैसे हार मान सकता था !!!!!
वह फाइनल राउंड में दौड़ा और अपने आत्मविश्वास, मेहनत और माँ-बाप के आशीर्वाद से जीत गया lवह और पूरा परिवार बहुत खुश था l अब तो उसका सिलेक्शन नेशनलस/फाइनल्स में भी हो गया lउससे स्टेट लेवल का अवार्ड मिला और उसको नेशनल एकेडमी, में आगे प्रैक्टिस के लिए चुना गया |
उसका परिवार इस बात से चिंतत हो गये के कबीर उनसे दूर जा रहा है lपर कबीर वहा जाने के लिए बहुत उत्सुक था और उसकी ख़ुशी के लिए उसके माता पिता उसे भेजने के लिए तैयार थे |कुछ दिन तक तो वह अपने परिवार के संपर्क में था lपर जैसे जैसे दिन बीतते गए कबीर अब एक भारत के बेहतरीन खिलाडी यानि एक स्टार बन चुका था| उसका बहोत नाम हो गया था | उसे अब उसका नाम विघ्यापन में आने लगा था | इसके साथ उसे अच्छे खासे पैसे भी मिलने लगे यानि वह अच्छा कमाने भी लगा था l
पर वह परिवार से धीरे धीरे बहुत दूर हो रहा था | अपनी ही शहर की दुनिया में खो गया थाl उसमें एक घमंड भी आने लगा था | उसके जैसा कोई नहीं है और कोई उसको हरा नहीं सकता lवह अपने आप को बहुत बड़ा समझने लगा था lहर महीने बस औपचारिकता के नाम पर थोड़े पैसे अपने घर भेज देता था l इस दौरान कबिरने शहर में एक बड़ा घर और गाडी ले लो lअब वह अपनी बुनियाद को भूल चूका था |
इसी बीच उसके पिताजी की तबियत बहुत ख़राब हो गयी थी l पैसे की भी जरुरत थी पर वह रेस का बहाना बोलकर वहा नहीं गया, कुछ रूपये भेजने का कहकर अपनी जिन्दगी में बिजी हो गया lउसका भाई मोटिवेशनल लेखक यानि के प्रेरक वक्ता बन गया था और वह समाजमें जाग्रति लाने के लिए कविता भी लिखता था | lकबीर को यह सब पसंद नहीं था |वह मानता था की जीवन मौज मजे के लिए है| इस वजह से वह अपने भाई से दूर हो गया था | वह अपने जीवन में बहुत व्यस्त हो गया था और उसको किसीसे लेना देना ही नहीं था l
एक दिन रेस की प्रैक्टिस करते समय उसके एक पैर में बहोत गहरी चोट लग गई | जिसकी वजह से उसे सर्जरी करवानी पड़ी lउसमे उसके बहुत पैसे भी खर्च होगये, यह तक की उसको अपनी गाड़ी भी बेचनी पड़ी और घर भी बेचना पड़ा| अब कुछ वक़्त तक डॉक्टर्स ने उसे बिलकुल आराम करने के लिए सलाह दी |
दोस्तों उस वक़्त हमारा देश कोविड का सामना कर रहा था | पुरे हिंदुस्तान में लोकडाउन लग गया था | कबीर भी कोविड के सकंजे में आ गया और और कोविड के फैलने की डर की वज़ह से उसको नेशनल एकेडमी से निकाल दिया गया | उसको अस्पताल में भर्ती कर दिया गया |
वह हॉस्पिटल में बहुत ही परेशान और दुखी था lबहुत अकेला महसूस कर रहा था| उसे चिंता थी की वह कैसे अस्पताल का खर्चा पूरा कर पाएगा !!!| तब उसकी मुलाकात हॉस्पिटल में एक आदमी से हुई | वह कबीर का बहोत बड़ा चाहने वाला था |
अब तो कबीर आश्चर्य में पड गया की ये आदमी हैं कोन? बातचीत से उसे पता चला की वह एक रिटायर्ड इंटरनेशनल कोच है और उन्हें भी कोविड हुआ हैlपर उन्होंने कबीर के रनिंग यानि खेल की तारीफ़ बहुत सुनी है lपर वह आदमी कबीर की उदासी देख कर कुछ परेशान सा हुआ |
तो कबीर ने बहुत ही दुःख के साथ अपनी हालत बताई, तो कोच ने उससे हौंसला दिया के वह चिंता ना करे lसब ठीक हो जायेगा lफिर उस कोच ने उससे कहा की तुम अपने परिवार से क्यों नहीं बात करते l कबीर ने अपनी मज़बूरी बताई के उसने अपने परिवार से काफी समय से बात नहीं की है | तो अब में किस मुँह से उनसे बात करू, क्या वह मुझसे बात करेंगे?
तो कोच ने बोला के तुम फ़ोन तो लगाओ, वह बिलकुल बात करेंगे कबीर ने उसके पिता को फ़ोन लगाया और अपनी पूरी बात बताई उसका परिवार भी उसके लिए बहुत चिंतित होगया पर उसको बोला की तुम चिंता मत करो, हम हमेशा तुम्हारे साथ है |
उसका गांव शहर से पास ही था तो उसके पिताजी ने डॉक्टर से request की के कबीर को एम्बुलेंस में घर भेज दे lऔर वह कबीर की देखभाल घर पर ही सेफ्टी के साथ करेंगे l
कबीर को कोविड के सिम्पटम्स इतने नहीं थे इसलिए डॉ. ने उसे घर पर Isolate होने की परमिशन देदी lउसके पिताजी ने परिवार के लिए जो भी बचत की थी उसी में से ही हॉस्पिटल का बिल भर दिया l
कोच को उसने धन्यवाद कहा और कोच ने उससे कहा की कोविड के बीमारी के बाद में तुम्हे तुम्हारी चोट को ठीक करने में दूर करने मदद करूंगा | कुछ दिनों में ही कबीर और कोच सर और कबीर की बहोत अच्छी दोस्ती हो गई |
अब कबीर अपने घर जाता है lउसके परिवार ने उसकी बहुत देखभाल की l
जहा कोविड से पूरी दुनिया डरी हुई थी lवह कोविड होते हुए भी उसके परिवार ने सेफ्टी रखते हुए उसकी सेवा की| कबीर अब ठीक हो गया था lउसे अभी धीरे धीरे एहसास हो रहा था के उसने घमंड में आकर परिवार से दूर रह कर सही नहीं किया lपर परिवार ने ही आखिर में सेवा की और साथ दिया |
कबीर का बहोत नुकसान हुआ था उस चोट की वज़ह से lरेस से भी दूर रहना पड़ रहा था, एकेडमी से भी उसको निकल दिया गया था, उसके सारे पैसे भी खर्च होगये थेl अब कबीर के पास उसका परिवार था जो उसकी हिम्मत था | उन्होंने उसका होंसला भी बढ़ाया की आगे सब कुछ अच्छा ही होगा |यह वक्त भी निकल जायेगा
कबीर अपनी चोट के लिए डॉक्टर को भी मिलने जाना था तो और वह परेशां भी था की वज़ह वह आगे रेस में दौड़ पाएगा की नहीं | अचानक से उसे कोच सर की याद किआ | जो उन्होंने वादा किया था की वह कबीर मदद करेगे | कबीर ने उनको रिक्वेस्ट की के वह भी उसके साथ डॉक्टर के पास चले और उसकी चोट के बारे में समझकर उसको मदद करे lकोच सर बड़ी ख़ुशी के साथ कबीर के साथ गए |
अभी भी डॉक्टर ने यही सलाह दी के कबीर को जल्दबाजी ना कर के थोडा और आराम करना जरुरी है | परिवार के साथ रह कर ख़ुशी के दिन बिताने से कबीर में जल्दी से ठीक होने लगा | पर कही न कही कबीर अन्दर से उदास था की उसके पास अब कोई ज्यादा रुपया नहीं बचा है और उसने जो अपने परिवार से दूर रह गलती की उसे वह बात दुःख दे रही थी |
कोच ने कबीर को समजाया के यह तुम्हारे लिए बहुत बड़ी सीख हैl हम जीवन में थोड़ा भी कुछ कर लेते है तो हमारे अन्दर घमंड आ जाता और हम वह सारी चीज़े भूल जाते है जो परिवार ने हमारे लिए की| हम अपने पहले की परिस्थिति भी भूल जाते है जिससे हम इतनी मेहनत करके आगे निकले है| हम इस दुनिया में नाम और पैसे कमाने में ही मशगुल हो जाते है l हम अच्छे इंसान ही नहीं बन पाते| हमें सबकी कदर करनी चाहिए, और हमें कभी भी अपने आप को बड़ा नहीं समझना चाहिए | जो कुछ हमें मिला है हमें भगवान् ही दिया है तो उसका शुक्रिया मान कर आगे मेंहनत करनी चाहिए l कबीर को अपने परिवार का त्याग याद आया जिससे उसकी आँखे भर आई lउसे अपनी गलती का अहसास होगया था l
उसने कोच सर से पूछा की अब में क्या करू? तो कोच ने बोला की अब तक तुम सब कुछ अपनी ख़ुशी के लिए ही कर रहे थे, अब तुम अपने परिवार की खुशी के लिए करो, जो तुम उनके लिए नहीं कर पाए lवह करो इससे तुम्हे भी ख़ुशी मिलेगी lकबीर कोच की यह बात सुनकर खुश हुआ और अब वह और भी ज्यादा मेहनत करने के लिए भी तैयार होगया lपर वह सोच में था के यह सब मैं कैसे करूँगा? उसने कोच सर को को धन्यवाद् किया l
उसने घर जाकर अपने परिवार से अपने किये के लिए सच्चे दिल से माफ़ी मांगी और उनसे कहा की में अब सब कुछ ठीक कर दूंगाl पिताजी का ऑपरेशन भी करवाएगा और अपने भाई की स्कूल की फीस का भी रास्ता निकलेगा lइसके लिए नौकरी करूँगा और पिताजी को भी काम में मदद करूँगा l
उसके परिवार ने उसे गले से लगा लिया lLock down था तो उसे बहुत मुश्किल से काम मिला lउसे मेडिकल शॉप में दवाइयो की डिलीवरी का काम मिला कोविड की खतरनाक परिस्थिति में भी अपने परिवार के लिए कबीर यह काम करने को तैयार थाl उसी के साथ उसने एक और नौकरी ढूंढ ली lजो घर बैठे कर पाए lउसने इन दोनों नौकरी में दिन रात एक कर दिया |
कुछ समय बाद कबीर ने अपने पिताजी का ऑपरेशन करवाया और अपने भाई के स्कूल की फीस भी दी lऔर उसके Classes भी चालु करवाएl कबीर अभी अपना वक्त परिवार के साथ गुजरने लगा थाl धीरे धीरे सब ठीक हो रहा था lकबीर और उसका परिवार बहुत खुश रहने लगे थे lकबीर की चोट भी अब समय के साथ हो रही थी l
एक दिन वह खुश होकर कोच सर से मिला और उसने गले लगाकर उनका धन्यवाद् किया lवह बहुत ख़ुश था lफिर उसने कोच सर से पूछा आप तो इंटरनेशनल कोच है और मे इतना छोटा हु फिर भी आपने मेरा इतना होंसला बढ़ाया, मेरी इतनी मदद की, ऐसा क्यों?
तो कोच ने जवाब दिया की किसीको मदद करने के लिए छोटा बड़ा नहीं देखते,तुम एक काबिल खेलाडी हो , तुमारी रनिंग के बारे में मैंने बहुत सुना भी थाl बस बीच में भटक गया तो हौसला तो बढ़ाने की जरुरत थी lऔर वैसे भी हमें अपने से छोटो को, तो आगे बढ़ाना ही चाहिय| किसीको कम नही समझना चाहिए| सबमे कुछ न कुछ काबिलियत तो होती ही है ,बस हौंसला बढ़ाने की जरुरत होती है और सही वक्त पर सही दिशा दिखाने की जरुरत है l
कबीर को कोच की यह बात बहुत अच्छी लगी | उसने बोला की में भी अपने भाई को पूरा सपोर्ट करूँगा और उसे अच्छा लेखक बनाने में उसकी मदद करुँगा | कबीर ने पूछा की आपने अनजान को भी मदद की, आप सच में महान हैlपर अब तक मुझे समज नहीं आ रहा की आपने ऐसे अनजान का होंसला क्यों बढ़ाया??? तब कोच ने एक बात कबीर को बताई | बहुत पहले तुमने एक आदमी की मदद की थीl जिसका एक्सीडेंट हुआ था l
तो कबीर ने आश्चर्य से पूछा की यह सब आपको कैसे पता, तो कोच ने बताया की वह आदमी में ही था जिसकी तुमने इतनी मदद की, तुम्हे रेस में देर हो रही थी lफिर भी तुमने मेरी मदद की| डॉक्टर ने भी यही कहा था की मुझे हॉस्पिटल पहुचाने में थोडी सी और देर हो जाती तो शायद मैं आज जिन्दा ना होताl तो तुम्हारा बहुत बहुत शुक्रिया, आज तुम्हारी वजसे में यहाँ हुl
अब तो कबीर और भी चोंक गया lकोच ने फिर कहा की यह हो तो इंसानियत है, एक दूसरे को मदद करना, भगवन ने हमको जीवन दिया है lतो उस में एक अच्छे इंसान बनना चाहिए | माता पिता की सेवा करनी चाहिए| एक दूसरे की कदर करनी चाहिए| तुमने देखा ने की कोविड ने हमें क्या कुछ नहीं सिखा दिया की हमें तकलीफ में हमारे अपने ही काम आते है हमारी मदद करते है |
यह नाम और पैसा तो चला जाएगा पर इंसानियत और परिवार हमेशा हमारे साथ रहेंगे lजो हम करेंगे वह ही हम पाएंगे l जब तुम पहले अपने परिवार के साथ थे, बहुत मेहनत करते थे, कुदरत से जुड़े हुए थे और तुमने मेरी मदद करके इंसानियत दिखाई | तुम बहुत खुश रहते थे और तुम्हे उसके वजसे ही इतनी सफलता मिली, पर उसके बाद तुम्हे अहंकार आ गया और तुम अपनी ही दुनिया में खो गए, नाम और पैसे के पीछे ही भागने लगे lऔर कुछ तुमने ध्यान ही नहीं दिया, परिवार को भी भूल गए | तब कुदरत ने सिख देने के लिए यह सब किया l
हम इंसान ऐसे ही गलती करते रहते है तबी कुदरत भी कोविड जैसी या कोई कठिनाई दे देते है l जिससे हमें सीख मिलती है| जो हमारे अच्छे के लिए ही होती है lतो हमें बिलकुल भी घबराना नहीं चाहिए lकठिनाई का सामना करना चाहिए lऔर अगर हमें अच्छे इंसान बने, कुदरत के लिए सब अच्छा करे तो हमारे जीवन में कोई कठिनाई नहीं आएगी l
इसी को तो कर्म कहते है,
अच्छा करो और अच्छा पाओ |
अच्छे इंसान बनेंगे तो सफलता खुद ही मिल जाएगी|
कबीर अपने कोच की बातों से बहुत प्रोत्साहित हुआ और ठान लिए के वह अब से यह सारी बातों का ध्यान रखेगा और जीवन में एक अच्छा इंसान बनेगा l उसके बाद भी कबीर ने बहुत मेहनत की lअब कबीर पूरी तरह से ठीक हो गया था |
उसने रनिंग में अपने अपनी वापसी की तैयारी की पर अब वो 30 साल का होगया था | रनिंग में २० साल के युवा भी थे तो बहुत लोगों ने उसकी वापसी पर सवाल उठाये के अब उसका कुछ नहीं हो सकता lपर उसने हार नहीं मानी , किसीकी एक न सुनी और दिन रत मेहनत की l वापस उसने नेशनल लेवल पर अपना नाम किया l और उसे इंटरनेशनल लेवल पर भी मौका मिला lपर इस बार उसकी ख़ुशी दुगनी थी क्युकी उसका परिवार उसके साथ था l उसने बहुत पैसे भी कमाए पर उन् पैसो से उसने अपने पिताजी को नया बिज़नेस खोलकर दिया, अपने परिवार के लिए नया घर किया , अपने भाई को बहुत सपोर्ट किया और उसका एडमिशन सबसे अच्छे कॉलेज में करवाया l कबीर अपने परिवार के साथ बहोत खुश था |
वह भगवान् का भी बहुत शुक्रिया अदा करता था|उनसे अपने और अपने परिवार के लिए हमेशा प्रार्थना करता था lदेखते ही देखते वह वर्ल्ड का बेस्ट रनर बन गया l उसको बहुत अवार्ड्स भी मिले l
एक इंटरव्यू में जब उससे पूछा गया की उसकी सफलता का राज क्या है तो उसने पूरा श्रेय अपने परिवार को और कोच सर को दिया और बोला की मेरे परिवार का सपोर्ट हमेशा मेरे साथ रहा है| हर परिस्थिति में मेरा साथ दिया है |कोच ने ही मेरा होंसला बढ़ाया और अच्छा इंसांन बनने के लिए प्रेरित किया lइसलिए ही तो में आज इतना सफल बन पाया l में अपने परिवार और कोच को पुरे दिल से धन्यवाद करता हु lऔर सबसे ज्यादा भगवान् को भी धन्यवाद करता हु के उन्होंने ही मुझे इतना अच्छा परिवार दिया, कोच दिए और इतनी सफलता दी lअच्छा इंसांन बनना ही सफलता का राज है l
उसके बाद उसने बीइंग गुड ह्यूमन नाम का कैंपेन शुरू किया जिसमे अपने भाई के लेखन की मदद से वह बच्चो को और युवाओ को अच्छे इंसान बनने के बारे में प्रेरित करता है l वह बच्चो को आगे बढ़ने का हौसला भी देते है और उनकी आगे बढ़ने में मदद करते है l
कबीर की यह कहानी सुनकर आर्ट्स के क्लास के सारे बच्चे बहुत प्रोत्साहित हुए और हैरान भी रह गए की जीवन में अच्छा इंसान बनना कितना जरुरी हैl
मिस गांगुली ने बच्चो से कहा की हमें भी जीवन में अच्छा इन्सान बनना है और अच्छे काम करने है| एक दूसरे को मदद करनी है, अपने परिवार की कदर करनी है, अहंकार नहीं करना है, भगवान् का हमेशा शुक्रिया अदा करना है | सफलता के रास्ते अपने आप खुल जाएगे |
सारे बच्चो ने मिस गांगुली से प्रॉमिस किया के वह अच्छे इंसान जरूर बनेंगे और उन्होंने बीइंग गुड ह्यूमन कैंपेन में हिस्सा लेने का भी फैसला लिया lसब बहुत खुश थे| हम भी अच्छे इंसान बनने के लिए प्रतिज्ञा ले lयह हमारे लिए कुदरत का दिया हुआ मौका एक वरदान भी है |
