द रनर- रेस टू सक्सेस 2
द रनर- रेस टू सक्सेस 2
हमने द रनर- रेस टू सक्सेस के पहले भाग में पढ़ा था कि किस तरह राहुल ने संघर्ष किया और अपनी कड़ी मेहनत और कोच की मदद से आखिरकार वह स्टेट लेवल चैंपियनशिप में जीत गया और नेशनल चैंपियनशिप के लिए भी सिलेक्ट होगया।
जब उसके माता पिता जीतने पर और नेशनल चैंपियनशिप के लिए सिलेक्ट होने पर उसे शाबाशी दे रहे थे और खुशियां मना रहे थे उस वक्त वहां एक आदमी आया।
वह आदमी डॉक्टर था जो राहुल के मां की रिपोर्ट ले आया था जो उन्होंने कुछ दिन पहले करवाई थी। डॉक्टर ने धीरे और दबी हुई आवाज में कहा की राहुल के मां की रिपोर्ट बिल्कुल भी अच्छी नहीं आई है और उनकी जान को खतरा है। यह सुनकर सब बहुत हैरान और दुखी हो गए। यह सुनकर राहुल की मां बहुत चिंतित और दुखी हो गई, वह रोने भी लगी। आगे डॉक्टर ने कहा कि राहुल की मां को जिंदा रहने के लिए एक ऑपरेशन करवाना होगा और दवाइयां लेनी होगी। पर उस वक्त राहुल के माता पिता और राहुल के मुंह से कोई शब्द नहीं निकल रहे थे। वह बहुत चिंतित थे कि इतने सारे पैसे कहां से आएंगे। तो राहुल ने अपने माता-पिता को हौसला देने के लिए कहा कि " पैसों का इंतजाम हो जाएगा और मां जल्द ठीक हो जाएगी, हमें चिंता नहीं करनी चाहिए और भगवान पर भरोसा करना चाहिए।" इस बात पर उसके पिता ने भी उसका साथ दिया। उतने में डॉक्टर बोला की "राहुल को नेशनल चैंपियनशिप या मां में से किसी एक को चुनना होगा।
डॉक्टर ने कहा कि अगर राहुल चैंपियनशिप में गया और उसने भारत को जिताया तो मैं पूरे शहर के डॉक्टर्स को उसकी मां का इलाज करने से मना कर दूंगा और खुद भी इलाज नहीं करूंगा। और अगर राहुल चैंपियनशिप में नहीं जाता है तो मैं राहुल की मां का इलाज मुफ्त में कर दूंगा और मुफ्त में एक बड़ा घर भी दूंगा।"
यह सुनकर राहुल और उसके माता-पिता बहुत हैरान और चिंतित हो गए। पर राहुल ने कहा की " मैं अपने देश के साथ गद्दारी नहीं करूंगा पर मैं अपनी मां का साथ भी नहीं छोडूंगा। मेरे लिए मां सबसे पहले आती है जिसने मुझे प्यार से और पैसे की मुश्किलों के बावजूद बड़ा किया। उसने कहा कि "वह कोई चिंता की बात नहीं है। मैं मां का ख्याल रखूंगा और उनकी सेवा करूंगा। मां जल्द ठीक हो जाएगी।" फिर उसने कहा कि "ऑपरेशन और दवाइयों के पैसों के लिए मुझे जितना भी काम और नौकरियां करनी पड़े मैं वह करूंगा।" उसने कहा कि" मैं स्टेट लेवल चैंपियनशिप में जीते हुए ₹5000 से एक दुकान भाड़े पर लेकर पिता की मदद से कपड़े सीलूंगा और बेच दूंगा और घर घर जाकर भी कपड़े बेच दूंगा। और जरूरत पड़ने पर दूसरों की गाड़ियां भी दूंगा पर मां का ऑपरेशन करवा कर ही रहूंगा और उनको ठीक करके ही रहूंगा।" उसने आगे कहा कि" अगर हम मुश्किलों से डरे नहीं, और उसका सामना करें तो कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती और उस मुश्किल का हल भगवान हमें दे ही देते हैं और भगवान हमें उस मुश्किल से बाहर भी निकालते हैं। भगवान हमारे साथ है तो हमें कोई भी दुख कैसे आ सकता है। उसकी बातें सुन उसके माता-पिता के आंखों में से आंसू आने लगे। उन्हें अपने बेटे की बातें सुनकर उस पर गर्व हो रहा था। और उसके पिता ने भी कहां की " हम मेहनत करके पैसों का इंतजाम कर देंगे कोई चिंता की बात नहीं है।"
राहुल की मां ने कहा कि " मैं बिल्कुल गलत सोच रही थी राहुल दूसरों बच्चों जैसा नहीं है। बहुत अच्छा है। हम तो डर ही गए थे और हमने हार मान ली थी पर राहुल ने बिल्कुल भी हार नहीं मानी और अपने सपने को भी छोड़कर जिसके लिए उसने इतनी मेहनत की है, मेरा साथ दिया।" राहुल की मां को भी अब यह बातें सुनकर सुकून मिलने लगा था और डर मिट गया था। उन्होंने कहा कि " हां हम इस मुश्किल से बाहर निकलेंगे।"
तब ही वहां पर एक और आदमी आया उसने अपना दीदी दिखाया, वह ही असली डॉक्टर था। उसने कहा कि राहुल के मां की सारी रिपोर्ट नॉर्मल है। राहुल और राहुल के माता पिता बहुत खुश हो गए पर वह हैरान भी थे कि उनके सामने जिसने अपने आप को डॉक्टर बताया वह कौन है। तो उन्होंने वह नकली डॉक्टर से पूछना शुरू किया। तुम नकली डॉक्टर ने अपनी नकली दाढ़ी, मूंछ और चश्मा निकाला।" वहां और कोई नहीं बल्कि राहुल के कोच थे। वह बेस बदल कर डॉक्टर बन कर आए थे। पर राहुल और उसके माता-पिता आश्चर्य में थे कि कोच ने ऐसा क्यों किया और उन्होंने कोच को पूछा। तो कुछ ने जवाब दिया की "मैं राहुल के मां की चिंता दूर करना चाहता था और उन्हें बताना चाहता था की राहुल दूसरों बच्चों जैसा बिल्कुल भी नहीं है वह अपने परिवार की बहुत फिक्र करता है और उन्हें बहुत प्यार करता है। इसलिए मैंने राहुल का ऐसा करके टेस्ट लिया जिसमें वह पूरे अंको से पास हो गया। यह सुनकर राहुल को और उसके माता-पिता को आखिरकार राहत मिली और उनकी सारी चिंताएं दूर हो गई। उन्होंने कोच को बहुत-बहुत धन्यवाद कहा। वहां सब खुश थे और कुछ को और राहुल के माता-पिता को राहुल पर बहुत गर्व भी था।
राहुल ने नेशनल चैंपियनशिप में भारत की तरफ से खेला और बहुत अच्छा प्रदर्शन किया उसने भारत का, अपने कोच का और माता-पिता का नाम रोशन किया।
तो हमें राहुल की कहानी से बहुत सारी बातें सीखने को मिलती है-
1. हमें अति आत्मविश्वास नहीं रखना चाहिए।
2. जितनी भी कठिनाइयां आ जाए हमें अपनी मेहनत जारी रखनी चाहिए।
3. हमें अपने सपनों को पूरा करने के लिए जितनी भी मेहनत और संघर्ष करनी पड़े हमें करनी चाहिए और हार नहीं माननी चाहिए।
3. हमें हमेशा हमारे गुरु/ टीचर की और माता पिता की सिखाई हुई बात माननी चाहिए। वह हमेशा हमारी सफलता में मदद करती है।
4. हमें अपने माता पिता की सेवा करनी चाहिए और उन्हें खुश रखना चाहिए।
5. हमें भगवान पर विश्वास करना चाहिए। वह जो भी करेंगे हमारे लिए अच्छा ही करेंगे।
6. हमें कड़ी से कड़ी मुश्किलों का सामना करना चाहिए तो भगवान भी हमें उन मुश्किलों से बाहर निकालने में मदद।
7. हमें मुश्किलों से डरना नहीं चाहिए और मुश्किलों का सामना करना चाहिए। हमें मुश्किलों में एक दूसरे का साथ देना चाहिए।
8. किसी भी परिस्थिति में अपने संस्कार नहीं बोलने चाहिए और गलत काम नहीं करना चाहिए।
यह सारी बातें राहुल ने की और राहुल को बहुत सफलता मिली और वह कामयाब और अच्छा इंसान बना।
तो हमें भी इन बातों से सीख लेकर अपने जीवन में सफलता पानी है और अच्छा इंसान बनना है।
धन्यवाद
