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Preet Wadhwani

Children Stories Drama Inspirational

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Preet Wadhwani

Children Stories Drama Inspirational

द रनर- रेस टू सक्सेस

द रनर- रेस टू सक्सेस

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आज हम राहुल की कहानी पढ़ेंगे। वह माता पिता के साथ एक छोटे से घर में रहता था। उनका परिवार गरीब था। कभी-कभी तो खाने के पैसे भी नहीं होते थे| पर राहुल के माता पिता कड़ी मेहनत करके कुछ पैसे कमाते थे ताकि राहुल को स्कूल में पढ़ा सके। राहुल गोद लिया हुआ बच्चा था पर यह बात उसे नहीं पता थी।

राहुल के माता पिता राहुल से बहुत प्यार करते थे और उसे अपनी मुश्किल परिस्थितियों में भी प्रेम प्यार से बड़ा किया है।

राहुल अपने स्कूल का सबसे तेज और सबसे अच्छा रनर था| वह अपनी तेज रनिंग के वजह से स्टेट लेवल चैंपियनशिप में सिलेक्ट हो गया था।वह स्कूल में रोज अपने कोच के साथ प्रैक्टिस करता था और कोच ने ही उसे यह सिलेक्ट होने की खुशखबरी बताई थी। उसने यह बात उसने यह बात अपने माता पिता को भी बताई। वह यह बात सुनकर बहुत खुश हो गए और उन्होंने राहुल को मेहनत करने को बोला और चैंपियनशिप में जीतने का आशीर्वाद भी दिया। चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए स्पोर्ट्स जूते और टीशर्ट की आवश्यकता थी| पर वह दुखी था क्योंकि उसके पास इतने पैसे नहीं थे ताकि वह स्पोर्ट्स जूते खरीद सके। उसने यह बात अपने दोस्त को बताई। उसके दोस्त ने उसे एक नए स्पोर्ट जूते तोहफे में दिए और उसकी मदद की। वह बहुत खुश हो गया और अपने दोस्त को धन्यवाद कहा। वह दौड़ता दौड़ता अपने कोच के पास गया और बोला उसे जूते मिल गए हैं और अब वह अच्छे से प्रैक्टिस करपाएगा। कोच ने राहुल को बोला कि "अगर तुम्हें चैंपियनशिप जीतनी है तो तुम्हें कड़ी से कड़ी मेहनत करनी होगी"। राहुल ने फिर जवाब दिया "हां मैं कड़ी से कड़ी मेहनत करूंगा और चैंपियनशिप जीतूंगा। राहुल के माता पिता टेलर थे और वह लोगों के कपड़े बनाके पैसे कमाते थे। 

राहुल सुबह में अपने रनिंग की प्रैक्टिस करता था और स्कूल जाता था और रात को अपने माता-पिता को कपड़े पैक करने में मदद करता था। राहुल की मां परेशान रहती थी कि आज कल के दूसरों बच्चों की तरह राहुल भी अपने माता पिता को वृद्ध आश्रम ना भेज दे और यह परेशानी उन्होंने राहुल के पिता और राहुल के कोच को भी व्यक्त की थी पर वह कह कर ही दिलासा देते थे की राहुल ऐसा नहीं करेगा और सब अच्छा ही होगा। पर राहुल की मां को यह चिंता लगी रहती थी। 

चैंपियनशिप नजदीक आ रही थी। तो कोच ने राहुल को बोला कि अब थोड़े ही दिनों में चैंपियनशिप है तो तुम्हें स्कूल के अलावा शाम को भी ज्यादा प्रैक्टिस करनी होगी। तो राहुल ने कहा कि "मुझे इतनी ज्यादा प्रैक्टिस की जरूरत नहीं है मैं स्कूल का सबसे तेज रनर हूं।' और जब उसके दोस्त भी राहुल को प्रेक्टिस करने के लिए बोलते थे तो वह बोलता था कि "मैं आसानी से जीत जाऊंगा।" राहुल को अति आत्मविश्वास आ गया था। अब उसकी रेस का दिन आ गया था। वहां अलग-अलग राज्यों से खिलाड़ी चैंपियनशिप में हिस्सा लेने आए थे। राहुल की रेस भी शुरू हो गई पर राहुल रेस में हार गया। राहुल बहुत दुखी और निराश था। कोच ने उसे बोला की कि कोई बात नहीं अब अगली बार फिर कोशिश करना और ज्यादा मेहनत करना। राहुल बहुत दुखी था और उसने कोच को बोला की " मैं स्कूल का सबसे तेज रनर हूं फिर भी मैं हार गया। कोच ने उससे बोला कि तुम अपने अति आत्मविश्वास के वजह से ही हारे हो। कोच ने उसे समझाया कि हमें अपने काम में आत्मविश्वास रखना चाहिए पर कभी भी अति आत्मविश्वास नहीं रखना चाहिए और हमें मेहनत करते रहनी चाहिए। राहुल ने कोच से माफी मांगी और कहा" आपकी बात बिल्कुल सही है। मैं और भी बहुत मेहनत करूंगा और अति आत्मविश्वास नहीं रखूंगा और अगली बार जीतने की पूरी कोशिश करूंगा। 

उसके माता-पिता ने भी उसका साथ दिया और उसे समझाया कि वह मेहनत और कोशिश करते रहे। अगले दिन स्कूल में प्रैक्टिस रेस थी पर राहुल प्रैक्टिस रेस में भी हार गया। उसके दोस्त उसका मजाक उड़ाने लगे। वह दुखी हो गया था और उसका आत्मविश्वास कम हो गया था। पर उसके कोच और माता पिता ने उसको हिम्मत दिलाई। उन्होंने राहुल को कहा कि वह यह सब पर ध्यान ना दे कर मेहनत करता रहे। कोच ने उसे बहुत प्रोत्साहन दिया और बहुत कुछ सिखाया। उसका उत्साह फिर से बढ़ गया था और वह अगली स्टेट चैंपियनशिप की तैयारी कर रहा था। उसने 1 साल तक बहुत मेहनत की और प्रैक्टिस की। राहुल ने अपने माता पिता और कोच का आशीर्वाद लिया और उनसे कहा की " इस बार मैं जीतने की पूरी कोशिश करूंगा"। रेस के पहले राउंड में राहुल को जीत मिल ही गई। पर भागते समय चोट लग गई थी। डॉक्टर ने उसे दौड़ने को मना किया क्योंकि दौड़ने से उसकी चोट गहरी हो सकती थी। डॉक्टर ने और सब ने राहुल को अगली मैच नाक खेलने को कहा और आराम करने को कहा क्योंकि उसके पैर में चोट लगी थी। पर राहुल ने सबसे कहा की " मेरा लक्ष्य है कि मैं स्टेट चैंपियनशिप जीतू और मैंने मेहनत भी बहुत की है। मैं अभी भी कोशिश करना चाहता हूं भले मैं हार जाऊं पर मैं फाइनल राउंड में रेस किए बिना ही पहले से ही हार नहीं मानना चाहता"। थोड़ा सोचने के बाद कोच ने भी उसका साथ दिया और उसे हिम्मत दी। दूसरा और फाइनल राउंड शुरू हो चुका था। यह राउंड में राहुल चोट के बावजूद भी जीत गया। वह अपनी मेहनत, कोशिश और आत्मविश्वास की वजह से जीता। वह बहुत खुश था। उसने अपनी जीत का श्रेय अपने कोच  और माता पिता को दिया। उसने कोच से कहा की " मैं आपकी वजह से ही जीत पाया हूं। आपने मुझे इतना अच्छे से ट्रेनिंग दी और मुझे मेहनत और कोशिश करके अपने जीवन में हार ना मानना सिखाया इस वजह से ही मैं जीत पाया हूं"। राहुल ने फिर कहा कि हर व्यक्ति के सफलता के पीछे गुरु का बहुत बड़ा हाथ होता है। व्यक्ति अपने जीवन में गुरु और माता पिता की शिक्षा के वजह से ही सफलता पाता है। राहुल ने ऐसा कह कर शुक्रिया कहा। राहुल की बातें सुनकर कुछ और माता-पिता भी भावुक हो गए। और वह भी राहुल की जीत पर बहुत प्रसन्न थे। राहुल को चैंपियनशिप अवार्ड भी मिला और राहुल नेशनल चैंपियनशिप के लिए सिलेक्ट भी हो गया। यह सुनकर राहुल तो खुशी से फूला ही न समाया। उसका सपना जो पूरा होने जा रहा था। उसके कुछ और माता-पिता को भी उस पर बहुत गर्व हो रहा था। 

राहुल ने यहां तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत और संघर्ष किया पर हार बिल्कुल भी नहीं मानी। 

हमें भी राहुल की अब तक की कहानी से सीख लेकर अपने जीवन में मेहनत करनी है और हार नहीं माननी है तो हमें हमारे कार्य में सफलता जरूर मिलेगी।


उसके माता-पिता उसे शाबाशी दे ही रहे थे कि उस वक्त एक आदमी आया। उसने राहुल से कहा कि " तुम्हें अपनी मां जान नेशनल चैंपियनशिप में से किसी भी एक को चुनना होगा। और उसने ऐसी बात कही की इस बात को सुनकर और उस आदमी को उस वक्त वहां पर देख कर सब हैरान और परेशान हो गए। इससे राहुल की जिंदगी में बदलाव आने वाला था?


कौन था वह आदमी? 

और उसने ऐसा तो क्या कहा जिसे सुनकर सब हैरान हो गए? 

क्या राहुल को मां और नेशनल चैंपियनशिप में से किसी एक को चुनना होगा?  

तो किसे चुनेगा राहुल? 

यह सब बातों का जवाब द रनर- रेस टू सक्सेस 2 मैं मिलेगा। 


द रनर- रेस टू सक्सेस 2  

जल्द ही।

क्रमशः


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