पिता सा कोई नहीं
पिता सा कोई नहीं
जब पिता शब्द की बात होती है। तो कुछ ठीक से बोल नहीं पाते ,कुछ लिख नहीं पाते , कुछ कह नहीं पाते। पिता से हम कोई अपने दिल की बात कभी कह नहीं पाते। जब भी कोई बात कहनी हो तो मां के पास जाते हैं। पिता के सामने चुप होकर रह जाते हैं। पिता जीवन में कितना कुछ कर जाता है। और हम उसे एक बार ठीक से धन्यवाद भी नहीं बोल पाते।
यह कहानी शुरू होती है एक छोटे से गरीब से परिवार के पिता और बेटे की एक प्यारी सी जिंदगी से। पिता हमेशा अपने काम पर लगा रहता था। और और बेटे के लिए ठीक से समय नहीं निकाल पाता। जब भी बेटा देखता पिता अपने काम पर लगा हुआ है उसे लगता था, पिता को उसकी कोई फिक्र ही नहीं है । लेकिन वह नादान बेटा कहां जानता था। पिता जो मेहनत कर रहा था वह अपने बेटे के लिए कर रहा था। बेटा बड़ा हुआ और बाहर नौकरी के लिए किया वहां उससे पैसे मांगेगे । पहले तो वह बहुत परेशान हुआ क्योंकि वह बड़े गरीब परिवार से था ।तब उसने पिता को याद किया। पलक झपकते ही पिता ने उसे पैसे भेज दिए। और बेटे को नौकरी लग भी गई। जब बेटे की दिमाग में ख्याल आया कि पिता ने इतने पैसे कहां से दिए। अपने पिताजी को फोन करके पूछा कि पापा इतने पैसे कहां से आए। पिता ने बड़े प्यार से जवाब दिया। जब तुम सोचते थे कि मैं तुम्हारे लिए समय नहीं निकाल पाता हूं । तब मैं मेहनत किया करता था। ताकि भविष्य में तुम लोगों के लिए कुछ कर सकूं। जब भी तुम्हें पैसों की आवश्यकता हो। तो मैं तुम्हें देख सकूं। बेटे को बड़ा दुख हुआ। बेटे को तब बहुत ही दुख हुआ।
इसलिए अपके पिता अगर आपके लिए समय नहीं निकाल पाते हैं। तो उनकी मजबूरी समझे। वह आपकी भविष्य की नींव रख रहे हैं।
