richa Bajpai

Inspirational Others


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फर्ज

फर्ज

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"पापा ! आप यहाँ इस वक्त सब ठीक तो है ना"...! बिटिया पता नहीं क्यों आज मन बहुत भारी हो रहा, तबियत कुछ ठीक नहीं लग रही, तेरी आज बहुत याद आ रही है। पापा के चेहरे पर कुछ पीलापन था।

अवनि घबरा कर उठी, सामने कोई ना था। ये एक सपना था, पर पापा के लिए उसका मन बेचैन हो उठा। रात अपने चरम पर थी, पर अवनि की नींद उड़ चुकी थी। रह- रह कर मन बस पापा के पास जाने को बेचैन हो उठता। अवनि ने जैसे - तैसे रात काटी।

सुबह उठकर भी उसका किसी काम मे मन नहीं लग रहा था।

जल्दी जल्दी घर का सब काम निपटा कर वह तैयार हो गयी।

" आज बैंक जल्दी जाना है क्या? इतनी जल्दी तैयार हो गयीं, विशाल ने ब्रेकफास्ट करते हुए, अवनि से पूछा।"

विशाल प्लीज़! मुझे पापा के पास ले चलो, उनकी तबियत सही नहीं है।

क्या हुआ उन्हे, उनका फोन आया था क्या, विशाल ने पूछा ? 

वैसे भी रोज़ शाम को हम उनसे मिलने तो जाते ही हैं।

"नहीं विशाल ! मैंने सपने में उन्हे बहुत दुखी देखा, वे बहुत कमजोर और बीमार लग रहे थे", अवनि ने रोते हुए कहा।"

मैडम! रो क्यों रही हो हम तुरंत ही चलते हैं, विशाल ने अवनि के कंधे पर हाथ रख कर कहा।                 


"अवनि दीदी आप आ गयी, अंकल जी आपको बहुत याद कर रहे थे", रमेश ने कहा।" रमेश, मैंने कहा था ना की पापा को थोड़ी भी दिक्कत हो तो मुझे फोन कर देना", अवनि भरे मन से बोली। हाँ दीदी ! आपको फोन करने ही वाले थे, तब तक आप आ गयी , रमेश बोला।

"दीदी पता नहीं क्या हुआ रात से अंकल जी को तेज बुखार है और कल से बस अवनि- अवनि की ही रट लगाये हुए हैं।

मैंने रात को उन्हे डॉक्टर से बात करके दवा दे दी थी और अभी आपको ही कॉल कर रहा था। 

मैं तो रात को ही फोन करना चाहता था पर अंकल जी ने मुझे मना कर दिया।

उन्होंने कहा - "कल तक मैं बिल्कुल ठीक हो जाऊँगा अवनि से मैं खुद बात करूँगा। इतनी रात को उसे परेशान करना उचित नहीं।"

"पापा क्या हुआ आपको", अवनि रोते हुए तुरंत उनसे लिपट गयी।

"अरे! कुछ नहीं गुड़िया! बस थोड़ा सा बुखार है, तू आ गयी ना अब वो भी जल्दी ही ठीक हो जाएगा, भूषण जी बोले।" 

चलिए पापा ! अभी भी बुखार तेज़ है, हम तुरंत डॉक्टर के पास चलते हैं, विशाल ने कहा।          


"इनका बुखार बहुत तेज़ है, आप तुरंत ब्लड टेस्ट करवा लीजिए, तब तक मैं कुछ दवाइयाँ लिख रहा हूँ आप इन्हे दे सकते हैं।" डॉक्टर ने भूषण जी का चेक अप करके कहा। जरूरत पड़ी तो इन्हे एडमिट भी करना पड़ सकता है, डॉक्टर ने भूषण जी के गिरते स्वास्थ्य को देखकर चिंता जताई। विशाल तुरंत ही भूषण जी को लेकर पैथोलॉजी लैब निकल गया और अवनि को घर छोड़ दिया।    


भूषण जी की तबियत अब भी ठीक नहीं लग रही थी विशाल ने ब्लड टेस्ट करवा कर डॉक्टर को फोन किया। डॉक्टर ने सलाह दी की इनके गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए इन्हे भर्ती करना ही सही होगा।

 

विशाल ने अवनि को फ़ोन करके अस्पताल आने को कहा और भूषण जी को लेकर फ़ौरन अस्पताल पहुँच गया।

अवनि भी तुरंत ही अस्पताल पहुँच गयी। विशाल ने कहा की मैंने सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं, तुम पापा का ध्यान रखो, मैं बस थोड़ी देर ऑफ़िस होकर आ जाता हूँ।

ठीक है तुम जाओ, तब तक मैं पूरा ध्यान रखूंगी।


पापा आपने सुबह से कुछ नहीं खाया है, ये खिचड़ी खा लीजिए और दवा खाकर आराम कीजिए। दवा खाकर भूषण जी को नींद आ गयी।

अवनि भी पास ही बैठी, झपकी लेने लगी। सारी रात सो जो नहीं पाई थी। "बेटा ठीक से खाना खाया कर कितनी दुबली हो गयी है, आज तबियत ठीक नहीं है क्या, आ मैं तेरा सर दबा दूँ , खाना तो शांति से बैठकर खाया कर हरदम भागती रहती है "- पापा के एक एक शब्द अवनि के दिमाग में घूम रहे थे।

बचपन से लेकर अब तक के घटनाक्रम किसी चलचित्र की भाँति उसके दिमाग मे घूमने लगे।


अवनि, भूषण और नैना की इकलौती बेटी थी। पहले भूषण, नैना और अवनि बड़े प्यार से रहते थे। फिर अवनि जब चार साल की हुई, नैना अक्सर भूषण से छोटी - छोटी बातों में भी झगड़ा किया करती। भूषण बहुत समझाने की कोशिश करते की इससे बच्चे के मन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन नैना पर इसका कोई प्रभाव ना पड़ता।

नन्ही अवनि डर के मारे अक्सर रोया करती। नैना ने एक दिन फैसला सुना दिया की वो अब भूषण के साथ नहीं रह सकती।

एक दिन तैश में आकर नैना घर छोड़कर चली गयी। जाते वक्त उसने अवनि की भी परवाह नहीं की, जो लगातार रोये जा रही थी।

अवनि रोते -रोते कह रही थी माँ ! प्लीज़ रुक जाओ, लेकिन नैना ने उसे मुड़कर देखा तक नहीं।

भूषण ने इसके बाद अवनि को माँ और पापा दोनों का ही प्यार दिया।

भूषण को कहीं से पता चला की नैना ने पैसों के लालच में किसी बुजुर्ग से शादी कर ली थी।

भूषण ने इन सब बातों का असर कभी भी अवनि पर नहीं होने दिया।


स्कूल के बच्चे भी अक्सर अवनि को चिढ़ाया करते।

कभी कोई साथी कहता अरे! देखो तो इसकी चोटी कितनी सुंदर, एक बड़ी एक छोटी। सुनकर सब बच्चे जोर - जोर से हँसते।

कोई कहता अरे! इसकी मम्मा तो इसे छोड़ कर भाग गयी, बेचारी अवनि ! 

अवनि रोज यह सब सुनती, रुआँसी होकर अपनी सीट पर ही बैठी रहती। पहले तो वह शिक्षकों से शिकायत किया करती थी, फिर उसने किसी से भी बात करना छोड़ दिया।


अपने पापा से भी कभी कुछ ना कहती की कहीं वे दुखी ना हो जाएं।

भूषण अवनि की मनोदशा को अच्छी तरह समझते थे, इसलिए अपनी तरफ से हर संभव प्रयास करते ताकि अवनि को किसी के सामने नीचा ना देखना पड़े।

धीरे-धीरे वे अवनि की सुंदर चोटी बनाना भी सीख गए।


लगभग सभी लोग उन्हें सलाह देते की उन्हें दूसरा विवाह कर लेना चाहिए पर वे अवनि के भविष्य को देखते हुए इंकार कर देते।

भूषण ने अवनि की माँ बनने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

उन्होंने पिता के साथ -साथ माँ की भूमिका भी बहुत अच्छे से निभाई।

हर छोटी से छोटी मुश्किल में, अमूमन जहाँ एक माँ बेटी की हमजोली बनकर मुश्किल हल करती है ; भूषण ने हर समय अवनि की मुश्किलें माँ बनकर दूर की।


दफ़्तर और घर के बीच तालमेल बैठाना हर किसी के वश की बात नहीं होती, लेकिन भूषण ने कही भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

अवनि जब कॉलेज में पहुँच गयी तो उस पर पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ भी था।

परीक्षाओं के समय जब रात - रात भर जाग कर अवनि पढ़ती तो भूषण भी साथ ही जागते, उसे चाय बनाकर देते, तो कभी अवनि को डांट कर जल्दी सोने के लिए कहते।


अवनि ने कभी पापा के रहते माँ की कमी महसूस ही नहीं की।

अवनि ने कड़ी मेहनत से पढ़ाई की और एक निजी बैंक में मैनेजर के पद पर नियुक्त हो गयी।

भूषण को बहुत गर्व था अपनी बेटी पर।

अवनि अपनी हर सफलता का श्रेय अपने पापा को ही दिया करती थी।


अवनि की शादी के लिए बहुत से रिश्ते आने लगे थे।

एक बार एक सज्जन अपने बेटे का रिश्ता लेकर आए। उनकी शर्त थी हम अपनी बहू को सब सुख सुविधाएं देंगे, ख़ुशियाँ उसके कदमों में होगी, पर उसे यह नौकरी छोड़ना होगा।

भूषण अवनि के मन को भाँप गये, उन्होंने तुरंत इस रिश्ते के लिए ना कर दिया। उन्होंने उन सज्जन से कहा की मेरी बेटी को पिंजरे में बंद करना मुझे कबूल नहीं, चाहे वह पिंजरा सोने का ही क्यों ना हो।

भूषण अवनि के बिन कुछ कहे ही उसके मन का हाल जान लेते थे।

अवनि को भी कभी - कभी आश्चर्य होता की पापा को सब पहले ही कैसे पता चल जाता है? 


पड़ोस के शर्मा जी ने अवनि के लिए विशाल के रिश्ते का प्रस्ताव रखा।


अवनि शादी के ख्याल से भी डर रही थी उसे लगता था ना जाने कैसा ससुराल मिले? उसके पापा अकेले कैसे रह पाएंगे? कौन उनका ध्यान रखेगा? 

उसने भूषण से साफ मना कर दिया की वह शादी ही नहीं करेगी। वो बस अपने पापा के साथ ही रहना चाहती है।

भूषण ने उसे बहुत समझाया की बस एक बार विशाल और उसके परिवार से मिल ले, फिर जैसा अवनि चाहेगी वही होगा।


अवनि और भूषण विशाल और उसके घर वालों के विचारों से बहुत प्रभावित हुए।

विशाल के पापा भी इसी शहर में सरकारी नौकरी में थे, पर अब वे रिटायर हो चुके थे, इसलिए वे विशाल की जल्दी ही शादी कर देना चाहते थे, ताकि अपनी जिम्मेदारी से मुक्त होकर अपने गाँव में, अपने खेतों में, अपना आगे का जीवन व्यतीत कर सकें।


विशाल ने अवनि को विश्वास दिला दिया था की शादी के बाद पापा हम दोनों के साथ ही रहेंगे।

लेकिन आपके माँ - पापा को इसमे आपत्ति हो सकती हैं अवनि ने चिंता जाहिर की।

"उन्हें कोई आपत्ति नहीं है बल्कि यह विचार तो मेरे पापा का ही है , कि पापा हमारी शादी के बाद हम दोनों के साथ ही रहे और मां की भी यही इच्छा है।"

"मैं तो चाहती हूं कि मां और पापा भी हमारे साथ ही रहें, वे लोग क्यों गांव जाना चाहते हैं अवनि ने विशाल से कहा।"

"कोई बात नहीं शादी के बाद तुम उन्हें इस बात के लिए राजी कर लेना विशाल ने अवनि से कहा।"

"विशाल मुझे नहीं लगता मेरे पापा हम दोनों के साथ रहने के लिए राजी होंगे अवनि ने चिंता व्यक्त की।"

तुम चिंता मत करो हम उन्हें मना लेंगे।

विशाल और उसके माता पिता बहुत ही उच्च विचारों वाले लोग थे।

विशाल के पिता ने शादी की केवल एक ही शर्त रखी थी, जो ये थी की शादी एक सादे समारोह के रूप में मंदिर में ही संपन्न होगी।

कोई भी दिखावा नहीं किया जाएगा और जो धनराशि ऐसे ही दिखावे में खर्च हो जाती , उसे हम किसी अनाथ आश्रम में दान कर देंगे।

भूषण और अवनि उनके इस शर्त पर खुशी-खुशी राजी हो गए।

एक मंदिर में अवनि और विशाल का विवाह संपन्न हो गया।

अवनि कुछ ही दिनों में अपने सास - ससुर की लाडली हो गयी। अवनि की सास के प्यार में उसे अपने पापा की छवि दिखाई देती थी।

शादी के अभी पंद्रह दिन ही हुए थे की अवनि के सास - ससुर ने गाँव जाने की तैयारी कर ली। अवनि बहुत दुखी हुई। उसने अपनी सासू माँ से कहा की वे लोग गाँव ना जाएं।

अवनि की सासू माँ ने उसे विश्वास दिलाया की वह कुछ दिनों में उसके ससुर जी को मना कर वापस ले आएँगी। अवनि इस शर्त पर उनके जाने के लिए मान गई।


अवनि और विशाल ने भूषण को अपने साथ रहने के लिए मनाने की बहुत कोशिश की पर वे राजी ही नहीं होते थे। अवनि और विशाल रोज शाम को उनसे मिलने ज़रुर जाया करते थे।


अवनि के ससुर ने रमेश को भूषण के साथ रख दिया था, ताकि कभी भी कोई जरूरत हो तो रमेश उनकी सेवा में उपस्थित रहे।

रमेश बहुत ही गरीब घर का लड़का था। पढ़ने में बहुत होशियार था और बहुत मन लगाकर भूषण की सेवा किया करता।

भूषण भी रमेश को पुत्र की तरह ही प्यार करते थे और उसकी पढ़ाई का जिम्मा उन्हीं ने ले लिया था।

भूषण, रमेश के घर भी हर महीने पैसे भेजा करते थे ताकि उसके माँ - बाप को आर्थिक संकट से दो - चार ना होना पड़े।

अवनि भी रमेश को अपने भाई की ही तरह मानती थी।

अभी अवनि के सास - ससुर को गए कुछ ही दिन हुए थे की उसके पापा की तबियत खराब हो गयी।


अवनि बेटा! अच्छे से सो जा, अब मुझे कुछ ठीक लग रहा है, भूषण की आवाज़ से अवनि उठ कर बैठ गयी। नहीं पापा! मैं ठीक हूँ, अवनि ने कहा।

मैं नर्स को बुला लाती हूँ, आपको ड्रिप लगनी है, अवनि बोली।


अब अवनि के सास - ससुर भी अस्पताल पहुँच चुके थे। विशाल आते हुए पैथोलॉजी से भूषण की रिपोर्ट भी ले आया था।

भूषण को मलेरिया था, लेकिन तेज बुखार के कारण उन्हें बहुत कमजोरी आ गयी थी। साथ ही उनका शुगर लेवल भी बहुत बढ़ गया था।


"अवनि बेटा! तुम घर जाओ, मैं और विशाल भूषण जी के पास रुकेगे" - अवनि के ससुर ने कहा।


अवनि अपने पापा के पास ही रहना चाहती थी, पर वह अपने ससुर जी की बात नहीं टाल सकी।

भरे मन से अवनि अपनी सासु माँ के साथ घर आ गयी।


तीन - चार दिनों में ही भूषण स्वस्थ हो गये थे और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

अवनि के ससुर जी ने इस बार भूषण की एक ना सुनी और उन्हें सीधे अपने घर ले आए। रमेश को भी उन्होंने यही बुला लिया।

भूषण, अवनि और विशाल को तो हमेशा साथ रहने के लिए मना कर देते थे, पर अवनि के ससुर की बात वे टाल नहीं पाए।

अवनि के ससुर ने साफ कह दिया था की अब भूषण अकेले नहीं रहेंगे बल्कि विशाल और अवनि के साथ ही रहेंगे।

"बेटी की भी पिता के लिए उतनी ही जिम्मेदारी होती है, जितनी की एक बेटे की।" अवनि के ससुर की यह बात सुनकर भूषण की आंखों में खुशी के आँसू छलक उठे।

लेकिन मेरी एक शर्त है, आप लोग भी गाँव में हमेशा के लिए नहीं रहेंगे, हाँ! कभी - कभी हम सब गाँव चला करेंगे।भूषण ने अवनि के ससुर से कहा।

आपके जैसा मित्र मिल जाए तो क्या कहने, चलिए अब गाँव जाना कैंसिल। अवनि के ससुर ने हँसते हुए कहा।

"अवनि! अब तुम्हारे पापा हमारे साथ ही रहेंगे। तुम और विशाल रमेश के साथ जाकर इनका सारा जरूरी सामान यहाँ ले आओ।" अवनि अपने ससुर जी से यह सुनकर बहुत खुश हुई।

मन ही मन उसने ईश्वर का शुक्रिया अदा किया की शायद उसने पूर्व जन्म में कोई पुण्य कार्य किये होंगे जो उसे इतना प्यारा परिवार मिला।

ये सुनकर तो वह और भी खुश थी की उसके सास - ससुर भी साथ ही रहेंगें, अब वे गाँव वापस नहीं जाएंगे।



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